मथुरा में मां पर बेटे की हत्या का आरोप

Update: 2026-07-28 04:04 GMT

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला पर अपने तीन वर्षीय बेटे की हत्या करने का आरोप लगा है। आरोप है कि महिला अपने प्रेमी से मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान बच्चे के रोने और शोर मचाने से परेशान रहती थी। इसी वजह से उसने कथित तौर पर मासूम की जान ले ली। घटना करीब एक महीने पहले की बताई जा रही है, लेकिन बच्चे के पिता की शिकायत पर सोमवार को मामला दर्ज होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनकी पत्नी ने जानबूझकर उनके तीन वर्षीय बेटे की हत्या की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू की। साथ ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महिला का किसी व्यक्ति से प्रेम संबंध होने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि वह अक्सर अपने कथित प्रेमी से मोबाइल पर लंबी बातचीत करती थी। इसी दौरान जब उसका छोटा बेटा रोता या शोर करता था तो उसे यह बात नागवार गुजरती थी। आरोप है कि इसी वजह से उसने मासूम को रास्ते से हटाने का फैसला किया और उसकी हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि घटना लगभग एक महीने पहले हुई थी। उस समय बच्चे की मौत को लेकर स्पष्ट संदेह सामने नहीं आया था। बाद में परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर बच्चे के पिता को शक हुआ कि बेटे की मौत स्वाभाविक नहीं थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सीय अभिलेख, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के समय घर में कौन-कौन मौजूद था और बच्चे की मौत के बाद किन परिस्थितियों में परिवार तथा आसपास के लोगों को जानकारी दी गई। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोग तीन वर्षीय मासूम की मौत से स्तब्ध हैं। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें इस तरह की घटना की उम्मीद नहीं थी। लोगों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह बेहद दुखद और अमानवीय घटना है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में पुलिस को वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से जांच करनी होती है। केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी महिला से पूछताछ जारी है और उसके बयान का अन्य साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच के दौरान यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ भारतीय कानून के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि जांच में कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

बाल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि घरेलू तनाव, पारिवारिक विवाद या व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े मतभेदों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव अक्सर बच्चों पर पड़ता है। ऐसे मामलों में समय रहते परिवार, समाज और संबंधित संस्थाओं द्वारा उचित हस्तक्षेप आवश्यक होता है।

फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है। अधिकारी इस मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। उधर, बच्चे के पिता ने अपने बेटे को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है। अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस जांच, फोरेंसिक साक्ष्य और न्यायालय की आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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