गोरखपुर : UPI शुल्क को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से इसे ‘गिफ्ट’ अभियान नाम दिया गया है, जिसके तहत कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा नेताओं, विधायकों और मंत्रियों तक अपनी बात पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।कांग्रेस का कहना है कि UPI जैसे डिजिटल भुगतान माध्यम पर किसी भी तरह का शुल्क आम लोगों और छोटे व्यापारियों को प्रभावित कर सकता है। वहीं सरकार की ओर से डिजिटल भुगतान व्यवस्था और शुल्क से जुड़े मुद्दों पर अलग रुख रखा जाता रहा है।
UPI शुल्क को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI भारत में डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक इसका इस्तेमाल किया जाता है।UPI पर शुल्क लगाने या नहीं लगाने को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस का ‘गिफ्ट’ अभियान
कांग्रेस ने UPI शुल्क के मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए एक अभियान शुरू करने की घोषणा की है।पार्टी कार्यकर्ता भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के घर जाकर अपनी बात रखने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि वह इस माध्यम से लोगों की चिंता को सामने रखना चाहती है।अभियान के तहत किस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, इसकी जानकारी पार्टी स्तर पर तय की जा रही है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि UPI आम लोगों के लिए आसान और कम लागत वाला भुगतान माध्यम बना है। ऐसे में किसी भी तरह के शुल्क से आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर असर पड़ सकता है।पार्टी ने सरकार से डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लोगों के हित में बनाए रखने की मांग की है।
भाजपा का रुख
भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता रहा है।सरकार का कहना है कि UPI ने देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया है और इसे आम लोगों के लिए आसान बनाया गया है।UPI शुल्क को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग तर्क सामने आते रहे हैं।
छोटे व्यापारियों पर असर की चर्चा
UPI का इस्तेमाल सबसे ज्यादा छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों के बीच भी होता है।व्यापारी संगठनों की ओर से भी समय-समय पर डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्क और लागत को लेकर अपनी चिंताएं रखी जाती रही हैं।
डिजिटल पेमेंट व्यवस्था का महत्व
भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। UPI ने बैंकिंग सेवाओं से दूर लोगों को भी आसान भुगतान विकल्प उपलब्ध कराया है।मोबाइल के जरिए तुरंत भुगतान की सुविधा ने लेनदेन के तरीके को काफी बदल दिया है।
राजनीतिक मुद्दा बना UPI
आर्थिक नीतियों से जुड़े कई मुद्दों की तरह UPI शुल्क भी अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।कांग्रेस इसे जनता से जुड़े मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि सरकार डिजिटल भुगतान के विस्तार और व्यवस्था की स्थिरता पर जोर देती रही है।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस का यह अभियान किस तरह आगे बढ़ता है और भाजपा की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।UPI शुल्क को लेकर अंतिम स्थिति सरकार की नीतियों, नियमों और संबंधित संस्थाओं के फैसलों पर निर्भर करेगी।
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