रक्षाबंधन पर रामलला को बहन शांता की राखी अर्पित, विशेष मुहूर्त में हुआ पावन अनुष्ठान
अयोध्या। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर भगवान श्रीरामलला की कलाई पर भी राखी बांधी गई। शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए रामलला को विशेष राखी अर्पित की गई, जिसे उनकी बड़ी बहन शांता की ओर से भेजा गया था।
रक्षाबंधन के लिए निर्धारित श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:23 बजे से 9:48 बजे तक के बीच रामलला को राखी बांधने का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया गया। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और विधि-विधान के साथ पर्व मनाया गया।
शांता की ओर से भेजी गई राखी
मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम की बड़ी बहन शांता थीं। रक्षाबंधन के अवसर पर हर वर्ष शृंगी ऋषि आश्रम से शांता की ओर से रामलला के लिए राखी भेजी जाती है।
इस वर्ष भी शृंगी ऋषि सेवा संस्थान की ओर से विशेष राखी अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचाई गई। यह राखी रामलला के साथ-साथ उनके भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के लिए भी भेजी गई।
परंपरा के अनुसार, इस राखी को भगवान के चरणों में अर्पित किया गया और शुभ समय में रामलला की कलाई पर बांधा गया।
वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन
शृंगी ऋषि सेवा संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर यह परंपरा निभाई जाती है। संस्था शांता की ओर से रामलला को राखी भेजती है, जिसे मंदिर में विधि-विधान से स्वीकार किया जाता है।
भक्तों के लिए यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और भगवान के प्रति प्रेम व आस्था का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर में रही विशेष तैयारियां
रक्षाबंधन के अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिर परिसर को सजाया गया और भगवान के विशेष श्रृंगार की व्यवस्था की गई।
सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की।
भाई-बहन के रिश्ते का धार्मिक महत्व
भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीराम और उनके परिवार से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व है।
रामलला को राखी अर्पित करने की परंपरा इसी भाव को दर्शाती है, जिसमें बहन अपने भाई की लंबी आयु और कल्याण की कामना करती है।
शांता का रामायण में विशेष स्थान
धार्मिक कथाओं के अनुसार, शांता राजा दशरथ और माता कौशल्या की पुत्री थीं। उन्हें भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माना जाता है।
शांता का उल्लेख रामायण की कथाओं में भी मिलता है। यही कारण है कि रक्षाबंधन जैसे पर्व पर उनसे जुड़ी परंपराएं भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र रहती हैं।
भक्तों में दिखा उत्साह
रामलला को राखी अर्पित किए जाने की जानकारी मिलने के बाद भक्तों में भी खास उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इसे गौरव और आस्था का क्षण बताया।
कई भक्तों का कहना था कि भगवान श्रीराम को भाई के रूप में मानकर राखी बांधने की यह परंपरा लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है।
अयोध्या में आस्था का पर्व
रक्षाबंधन के अवसर पर पूरी अयोध्या नगरी भक्तिमय नजर आई। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
श्रीरामलला को बहन शांता की ओर से भेजी गई राखी ने इस पर्व को और भी खास बना दिया। यह परंपरा भगवान और भक्तों के बीच प्रेम और विश्वास के संबंध को दर्शाती है।