मधुबन। देवारा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सरयू नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से क्षेत्र में दोबारा बाढ़ का संकट गहरा गया है। गुरुवार को हाहानाला पर सरयू नदी का जलस्तर खतरे के बिंदु 66.31 मीटर से 54 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 66.85 मीटर दर्ज किया गया। बढ़ते जलस्तर के कारण चक्कीमुसाडोही समेत कई गांवों में जनजीवन प्रभावित हो गया है।

क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी आबादी वाले हिस्सों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों को घरों और जरूरी सामान की सुरक्षा को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है।

इससे पहले 13 सितंबर को भी हाहानाला पर सरयू नदी का जलस्तर बढ़कर 66.45 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद नदी का पानी धीरे-धीरे घटने लगा था और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से स्थिति फिर गंभीर हो गई है।

गुरुवार को दर्ज 66.85 मीटर का जलस्तर सितंबर के पिछले बढ़ाव से भी अधिक है। खतरे के निशान से आधा मीटर से ज्यादा ऊपर बह रही नदी के कारण देवारा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का दबाव बढ़ गया है।

चक्कीमुसाडोही गांव सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल बताया जा रहा है। यहां संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों को दैनिक जरूरत की वस्तुएं लाने और बच्चों तथा बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।

कई जगह सड़कें और रास्ते पानी में डूब गए हैं। ग्रामीण ऊंचे और सुरक्षित रास्तों से आवाजाही की कोशिश कर रहे हैं। खेतों में भी पानी भरने से फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। खासकर नदी के किनारे वाले खेत सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

बाढ़ का पानी आबादी में प्रवेश करने से घरों के आसपास जलभराव की स्थिति बन गई है। कई परिवारों ने जरूरी सामान ऊंचे स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है। ग्रामीण नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

देवारा क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ना हर साल बड़ी चुनौती बनता है। नदी के किनारे बसे गांवों में पानी बढ़ते ही संपर्क मार्ग सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इसके बाद पानी खेतों और आबादी तक पहुंचने लगता है।

इस बार दूसरी बार बाढ़ जैसी स्थिति बनने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। सितंबर में पानी घटने के बाद ग्रामीण सामान्य जीवन की ओर लौटने लगे थे, लेकिन अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से उन्हें फिर उसी संकट का सामना करना पड़ रहा है।

कई ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बदलते जलस्तर के कारण घरों से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। विशेष रूप से रात के समय पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।

क्षेत्र में नाव और अन्य वैकल्पिक साधनों की जरूरत बढ़ सकती है। यदि जलस्तर और ऊपर जाता है तो गांवों का संपर्क पूरी तरह कटने की आशंका भी बनी हुई है।

बाढ़ की स्थिति में सबसे अधिक समस्या बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को होती है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।

कई स्थानों पर पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित जगह की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। बाढ़ का पानी खेतों और खुले स्थानों तक पहुंचने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ रही है।

सरयू के बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे बसे गांवों में लोग सतर्क हो गए हैं। ग्रामीण ऊंचे स्थानों की पहचान कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी रही तो प्रशासन को राहत और बचाव व्यवस्था बढ़ानी पड़ सकती है। विशेष रूप से संपर्क मार्ग कटने वाले गांवों में नाव, खाद्य सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत पड़ सकती है।

बाढ़ की स्थिति का असर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है। गांवों से लोगों का आवागमन कम होने से रोजमर्रा की खरीद-बिक्री प्रभावित होने लगती है।

खेतों में पानी भरने के कारण किसान भी चिंतित हैं। यदि पानी लंबे समय तक बना रहा तो फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे पहले भी नदी के बढ़े जलस्तर का असर खेती पर पड़ चुका है।

हाहानाला पर खतरे का बिंदु 66.31 मीटर है, जबकि गुरुवार को नदी 66.85 मीटर पर बह रही थी। इस तरह जलस्तर खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।

यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिनों पहले तक नदी का पानी घट रहा था। अब दोबारा तेज बढ़ोतरी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

देवारा क्षेत्र में बाढ़ का संकट केवल पानी भरने तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ ही सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और पशुपालन जैसी कई व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।

ग्रामीणों को अब सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि सरयू का जलस्तर कब तक बढ़ेगा। यदि पानी जल्द नहीं घटा तो कई गांवों में हालात और खराब हो सकते हैं।

फिलहाल चक्कीमुसाडोही समेत आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने के कारण अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है।

सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर देवारा क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सितंबर में आई बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहे गांवों को अब दोबारा पानी की मार झेलनी पड़ रही है।

गुरुवार को खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अब लोगों की नजर नदी के जलस्तर पर है और सभी को पानी घटने का इंतजार है।

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