गाजियाबाद। साइबर ठगों ने मोबाइल फोन हैक कर राजेंद्र नगर निवासी एक व्यक्ति के बैंक खाते से 4.88 लाख रुपये निकाल लिए। आरोपियों ने ठगी की इस वारदात को अंजाम देने के लिए व्हाट्सएप का सहारा लिया। पीड़ित के मोबाइल पर एपीके (APK) फाइल भेजकर ठगों ने फोन तक पहुंच बनाई। इसके बाद उज्जीवन स्माल फाइनेंस बैंक में जमा पीड़ित की चार फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को समय से पहले तुड़वाया और उनकी रकम बचत खाते में स्थानांतरित कर दी। इसके बाद खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए।
घटना
सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा और मोबाइल फोन के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
व्हाट्सएप पर भेजी गई थी एपीके फाइल
जानकारी के अनुसार, राजेंद्र नगर निवासी व्यक्ति साइबर ठगों के निशाने पर आ गया। आरोपियों ने सबसे पहले उसके व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी। आमतौर पर एंड्रॉयड मोबाइल में एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए एपीके फाइल का इस्तेमाल किया जाता है। साइबर अपराधी इसी तरीके का दुरुपयोग कर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।
ऐसी फाइल के जरिए मोबाइल में संदिग्ध एप इंस्टॉल होने पर फोन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। यदि एप को जरूरी अनुमतियां मिल जाती हैं, तो वह मोबाइल में मौजूद कुछ जानकारियों तक पहुंच बना सकता है। कुछ मामलों में इसका इस्तेमाल बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने या पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी किया जाता है।
इस मामले में भी आरोपियों ने कथित तौर पर एपीके फाइल के माध्यम से पीड़ित के मोबाइल तक पहुंच बनाई। हालांकि, फाइल किस नाम से भेजी गई थी और पीड़ित ने उसे किस तरह खोला या इंस्टॉल किया, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
चार एफडी समय से पहले तुड़वाईं
मोबाइल तक पहुंच बनाने के बाद साइबर ठगों ने बैंक खाते में जमा रकम पर निशाना साधा। पीड़ित की उज्जीवन स्माल फाइनेंस बैंक में चार फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी जमा थीं। आरोपियों ने इन एफडी को निर्धारित समय से पहले तुड़वाकर उनकी रकम बचत खाते में स्थानांतरित कर दी।
एफडी को समय से पहले तुड़वाने और रकम को बचत खाते में पहुंचाने की इस प्रक्रिया के बाद ठगों के लिए खाते से पैसे निकालना आसान हो गया। इसके बाद आरोपियों ने बचत खाते से कुल 4.88 लाख रुपये निकाल लिए। जब पीड़ित को अपने खाते से रकम निकाले जाने की जानकारी मिली, तब तक उसे बड़ा आर्थिक नुकसान हो चुका था।
इस वारदात में खास बात यह है कि ठगों ने सीधे बचत खाते से रकम निकालने के बजाय पहले एफडी की रकम को खाते में स्थानांतरित कराया। इससे पता चलता है कि साइबर अपराधी बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं।
बिना ओटीपी बताए भी खतरे में पड़ सकती है बैंकिंग जानकारी
साइबर ठगी के मामलों में अक्सर लोगों को लगता है कि जब तक वे किसी को ओटीपी नहीं बताएंगे, तब तक उनके खाते से पैसे नहीं निकल सकते। लेकिन मोबाइल में संदिग्ध एप इंस्टॉल करना, अनजान लिंक खोलना या किसी फाइल को बिना जांचे डाउनलोड करना भी जोखिम भरा हो सकता है।
कुछ दुर्भावनापूर्ण एप मोबाइल की संवेदनशील जानकारियों तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। यदि किसी एप को एसएमएस पढ़ने, स्क्रीन देखने या अन्य संवेदनशील सुविधाओं की अनुमति मिल जाती है, तो इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इस घटना में ठगों ने किस तकनीकी तरीके से बैंकिंग प्रक्रिया पूरी की, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इसलिए मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी है कि वे किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई एपीके फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। व्हाट्सएप पर किसी परिचित के नाम से फाइल आने पर भी पहले उसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए। कई बार साइबर अपराधी परिचितों के नाम या
अकाउंट
का इस्तेमाल करके लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
मोबाइल और बैंक खाते की सुरक्षा के लिए बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल फोन में किसी भी अनजान एप को इंस्टॉल करने से बचना चाहिए। एप डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक एप स्टोर का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित विकल्प है। इसके अलावा, मोबाइल में इंस्टॉल किए गए एप की अनुमतियों की समय-समय पर जांच करनी चाहिए और अनावश्यक अनुमतियों को बंद रखना चाहिए।
बैंक खाते और एफडी से जुड़े अलर्ट भी सक्रिय रखना जरूरी है। खाते में किसी भी तरह का संदिग्ध लेनदेन दिखाई देने पर तत्काल बैंक से संपर्क कर संबंधित खाते या डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं को सुरक्षित कराने की कोशिश करनी चाहिए। यदि मोबाइल हैक होने का संदेह हो, तो सुरक्षित डिवाइस की मदद से बैंक को इसकी सूचना देनी चाहिए।
साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते सूचना देने से ठगी की रकम को रोकने या आगे ट्रांसफर होने से बचाने की संभावना बढ़ सकती है।
राजेंद्र नगर निवासी व्यक्ति के खाते से 4.88 लाख रुपये निकाले जाने की यह घटना मोबाइल फोन की सुरक्षा में लापरवाही के गंभीर परिणामों को सामने लाती है। व्हाट्सएप पर आई एक संदिग्ध फाइल के जरिए शुरू हुई ठगी में पीड़ित की चार एफडी की रकम भी नहीं बच सकी। ऐसे में मोबाइल पर आने वाली अनजान फाइलों और लिंक को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
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