मथुरा। दिल्ली-आगरा हाईवे से जुड़े फतिहा गांव से हथियाबली-सनौरा-बेरी होते हुए ओल कस्बा तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब है कि निर्माण के दो दिन बाद ही सड़क उखड़ने लगी।
निर्माण कार्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। आरोप है कि वीडियो सामने आने के बाद डामर वाली सड़क पर सीमेंट का लेप कर दिया गया, जिससे लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों ने रोका सड़क निर्माण
जानकारी के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण का काम फतिहा गांव से शुरू होकर हथियाबली, सनौरा, बेरी होते हुए ओल कस्बे तक किया जा रहा है। बुधवार सुबह बेरी गांव के ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बनने वाली सड़क लंबे समय तक चलनी चाहिए, लेकिन निर्माण के तुरंत बाद ही इसमें खामियां दिखाई देने लगीं।
राजस्थान जाने का महत्वपूर्ण मार्ग
यह सड़क मार्ग ओल कस्बे के रास्ते राजस्थान के भरतपुर की दूरी कम करता है। क्षेत्र के लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है।
सड़क चौड़ीकरण का काम स्थानीय विधायक पूरन प्रकाश की निधि से कराया जा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि जनहित से जुड़े इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
ठेकेदार पर लगाए गुणवत्ता से समझौते के आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर आरोप लगाया कि सड़क बनाने में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
निर्माण कार्य से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया। वीडियो में सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो सामने आने के बाद सड़क पर सीमेंट का लेप कर दिया गया, जिससे उन्हें संदेह हुआ कि निर्माण में कमी को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, इस संबंध में ठेकेदार या संबंधित विभाग की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच की मांग कर रहे ग्रामीण
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या तकनीकी विशेषज्ञों से कराई जाए।
उनका कहना है कि यदि सड़क खराब गुणवत्ता से बनाई गई तो आने वाले समय में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और सरकारी धन का भी नुकसान होगा।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान अधिकारियों को मौके पर निरीक्षण करना चाहिए था, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों ने कहा कि समय-समय पर जांच होने से ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल ग्रामीणों के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। अब संबंधित विभाग की ओर से मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर लोगों की नजर है।
यदि जांच में निर्माण कार्य में खामियां पाई जाती हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं करेंगे और जब तक गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे।