प्रयागराज। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इन दिनों उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। तेजी से बढ़ी चीनी की कीमत में जहां अब कुछ राहत देखने को मिली है, वहीं दूसरी ओर आटा, मैदा, सूजी और खाद्य तेल के दाम में बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। थोक बाजार में चीनी का भाव घटकर 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। इसका असर फुटकर बाजार में भी दिखाई देने लगा है। 31 अगस्त तक जहां चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं तीन सितंबर को इसकी कीमत घटकर 65 रुपये प्रति किलो रह गई।
हालांकि, चीनी के दाम में आई इस राहत के साथ ही अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतें बढ़ गई हैं। थोक बाजार में आटा, मैदा और सूजी के भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा 15 लीटर वाले फार्चून तेल के दाम में 30 रुपये और पाम ऑयल की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि हुई है। कारोबारियों के अनुसार, थोक बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर आने वाले दिनों में फुटकर बाजार पर पड़ सकता है।
31 अगस्त तक 70 रुपये किलो थी चीनी
चीनी के दाम में पिछले कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी। 31 अगस्त तक फुटकर बाजार में चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। इससे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। खासकर चाय, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में चीनी की खपत अधिक होने के कारण इसके दाम बढ़ने का असर व्यापक रूप से दिखाई देता है।
हालांकि, एक सितंबर से चीनी के भाव में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। बाजार में धीरे-धीरे कीमत कम हुई और तीन सितंबर तक चीनी का फुटकर भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी कुछ ही दिनों में उपभोक्ताओं को करीब पांच रुपये प्रति किलो की राहत मिली है।
थोक कारोबारियों का कहना है कि चीनी के भाव में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बाजार में आवक, मांग और आपूर्ति की स्थिति के आधार पर कीमतों में बदलाव संभव है।
थोक बाजार में 5,800 रुपये क्विंटल पहुंचा भाव
चीनी का थोक भाव अब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। थोक कीमत में कमी का असर फुटकर बाजार में भी देखने को मिला है। दुकानदारों के मुताबिक, नई दरों के हिसाब से चीनी की खरीद होने पर ग्राहकों को भी कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि केवल चीनी के सस्ते होने से बाजार में खाद्य वस्तुओं की महंगाई कम नहीं हुई है। दूसरी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से दुकानदारों और ग्राहकों दोनों पर असर पड़ रहा है।
आटा, मैदा और सूजी के भाव बढ़े
चीनी के दाम घटने के बीच आटा, मैदा और सूजी की कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार का संतुलन बदल दिया है। थोक बाजार में इन तीनों वस्तुओं के भाव में प्रति क्विंटल करीब 100 रुपये की वृद्धि हुई है।
आटा रोजमर्रा की जरूरत की प्रमुख खाद्य सामग्री है। घरों के अलावा होटल, ढाबे और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में भी इसकी खपत बड़ी मात्रा में होती है। ऐसे में आटे के दाम बढ़ने का असर सीधे उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है।
इसी तरह मैदा और सूजी का इस्तेमाल बेकरी उत्पादों, मिठाइयों और विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में होता है। इनके दाम बढ़ने से इनसे तैयार होने वाले उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर बाजार में तैयार खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
खाद्य तेल भी हुआ महंगा
खाद्य तेल की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। 15 लीटर वाले फार्चून तेल के दाम में 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं पाम ऑयल 60 रुपये महंगा हुआ है।
खाद्य तेल की कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि रोजाना खाना बनाने में इसकी जरूरत होती है। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और नमकीन सहित कई खाद्य कारोबारों में तेल की खपत बड़ी मात्रा में होती है।
कारोबारियों का कहना है कि यदि खाद्य तेल के दाम में बढ़ोतरी आगे भी जारी रहती है तो इसका प्रभाव बाजार में बिकने वाले कई खाद्य उत्पादों की लागत पर पड़ सकता है।
फुटकर बाजार पर पड़ेगा सीधा असर
थोक बाजार में आटा, मैदा, सूजी और खाद्य तेल के दाम बढ़ने के बाद अब इसका असर फुटकर बाजार में आने की संभावना है। थोक व्यापारी जब बढ़ी हुई कीमत पर माल खरीदेंगे तो खुदरा दुकानदारों को भी उसी अनुपात में कीमत बढ़ानी पड़ सकती है।
इसका सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा। पहले से महंगाई का सामना कर रहे उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की खाद्य सामग्री के दाम में लगातार बदलाव चिंता का विषय बना हुआ है।
हालांकि चीनी के मामले में उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 70 रुपये किलो से घटकर 65 रुपये किलो आने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन आटा, मैदा, सूजी और तेल के दाम बढ़ने से यह राहत सीमित होती दिखाई दे रही है।
कारोबारियों की नजर बाजार के अगले रुझान पर
व्यापारियों की नजर अब आने वाले दिनों में बाजार के रुख पर है। चीनी के दाम में गिरावट जारी रहती है या फिर दोबारा तेजी आती है, यह मांग और आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। वहीं आटा, मैदा, सूजी और खाद्य तेल के बढ़े हुए भाव फुटकर बाजार में कितने बढ़ते हैं, इस पर भी उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।
फिलहाल बाजार की स्थिति मिश्रित है। एक तरफ चीनी के दाम में पांच रुपये प्रति किलो तक की राहत मिली है, तो दूसरी तरफ रोजमर्रा की कई अन्य जरूरी वस्तुएं महंगी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में खाद्य बाजार की कीमतों में और बदलाव होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।