उन्नाव : उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर सड़क धंसने का मामला सामने आया है। उन्नाव जिले में बसीरतगंज टोल के पास प्रयागराज जाने वाली लेन में सड़क का हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे करीब 5 फीट गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था (ड्रेनेज सिस्टम) पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सड़क धंसने की जानकारी मिलते ही एक्सप्रेसवे पर तैनात कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची कार्यदायी संस्था की टीम ने तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी की और वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया। इसके बाद सड़क की मरम्मत का काम शुरू किया गया।
बारिश के बाद सामने आई बड़ी खामी
बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में मिट्टी बैठने और जलभराव जैसी स्थिति बनी। सड़क धंसने के बाद आसपास की संरचना भी प्रभावित नजर आई, जिससे ड्रेनेज सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इतने बड़े एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि निर्माण के समय गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था।
पहले भी धंस चुका है एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बारिश के दौरान उन्नाव क्षेत्र में सड़क धंसने और बड़े गड्ढे बनने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अगस्त में भी एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में करीब 10 मीटर गहरे गड्ढे की खबर आई थी, जिसके बाद मरम्मत कराई गई थी।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण एक्सप्रेसवे की मजबूती और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को लेकर विपक्ष और आम लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी की मजबूती, जल निकासी और निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल
बारिश के मौसम में एक्सप्रेसवे पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली है। टोल प्लाजा के आसपास पानी जमा होने के वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने कहा कि अगर पानी निकासी की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो भविष्य में सड़क को नुकसान पहुंच सकता है।
सड़क विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं में सिर्फ सड़क की ऊपरी परत मजबूत होना काफी नहीं होता। नीचे की मिट्टी की परत, पानी की निकासी और नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि पानी लंबे समय तक सड़क के नीचे जमा होता है तो मिट्टी कमजोर होकर धंसाव का कारण बन सकती है।
अधिकारियों ने शुरू कराई जांच
घटना के बाद संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित हिस्से की जांच कर आवश्यक मरम्मत की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि सड़क धंसने की असली वजह क्या रही।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है और इसे प्रदेश के विकास के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही सड़क धंसने और जलभराव जैसी समस्याओं ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।