मालती नदी के पुनरोद्धार की तैयारी तेज, 3.6 करोड़ के प्रस्ताव को शासन भेजा गया
अमेठी। जिले की प्रमुख जलधारा मालती नदी के पुनरोद्धार और कायाकल्प की दिशा में प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। ‘एक जनपद एक नदी’ अभियान के तहत मालती नदी को फिर से जीवंत करने की योजना तैयार कर ली गई है। इसके लिए सिंचाई विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
सिंचाई विभाग की ओर से नदी की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद नमामि गंगे योजना के तहत करीब 3.6 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। शासन से मंजूरी मिलते ही नदी के पुनरोद्धार का काम शुरू कर दिया जाएगा।
नदी के संरक्षण के लिए बनाई गई कार्ययोजना
मालती नदी के कायाकल्प के लिए तैयार कार्ययोजना में नदी की सफाई, जल प्रवाह को बेहतर बनाने और इसके प्राकृतिक स्वरूप को वापस लाने पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि नदी में जमा गाद और अन्य अवरोधों को हटाकर जलधारा को सुचारु किया जाएगा। इसके अलावा नदी किनारे के क्षेत्रों को भी बेहतर बनाने की योजना बनाई गई है।
सिंचाई विभाग को बनाया गया नोडल विभाग
मालती नदी के पुनरोद्धार की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है।
शारदा सहायक खंड-41 के अधिशासी अभियंता की ओर से अधिकारियों ने नदी का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नदी की वर्तमान स्थिति, जल प्रवाह और आवश्यक सुधार कार्यों का आकलन किया गया।
इसके आधार पर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
नमामि गंगे योजना से मिलेगा बजट
नदी के पुनर्जीवन के लिए नमामि गंगे योजना के तहत धनराशि का प्रस्ताव भेजा गया है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद नदी में सुधार कार्यों को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
39 किलोमीटर से अधिक लंबी है मालती नदी
मालती नदी जिले की महत्वपूर्ण जलधाराओं में शामिल है। यह नदी क्षेत्र के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का अहम हिस्सा है।
इसकी कुल लंबाई 39.393 किलोमीटर है। इसमें से करीब 31.693 किलोमीटर हिस्सा अमेठी जिले में और 7.700 किलोमीटर हिस्सा प्रतापगढ़ जिले में आता है।
यह नदी संग्रामपुर क्षेत्र के बड़गांव के खरहा से निकलती है और प्रतापगढ़ जिले के ग्राम जलालपुर ब्लॉक मगरौरा के चमरौरा में जाकर मिलती है। यह आगे चलकर सई नदी की सहायक नदी के रूप में जुड़ती है।
ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी नदी
मालती नदी का महत्व केवल जलधारा के रूप में नहीं है, बल्कि यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका से भी जुड़ी हुई है।
ऐतिहासिक रूप से नदी किनारे बसे गांवों के लोग सिंचाई और पशुपालन के लिए इस पर निर्भर रहे हैं।
नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहने से खेतों की सिंचाई में मदद मिलती थी और पशुओं के लिए भी पानी का प्रमुख स्रोत रही है।
प्राकृतिक जल स्रोत को मिलेगा नया जीवन
अधिकारियों का मानना है कि नदी के पुनरोद्धार से क्षेत्र के पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा नदी के आसपास जैव विविधता को भी संरक्षण मिलेगा।
ग्रामीणों में जगी उम्मीद
मालती नदी के कायाकल्प की खबर से क्षेत्र के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है।
लोगों का कहना है कि लंबे समय से नदी में सफाई और जल प्रवाह सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी।
यदि योजना के अनुसार काम पूरा होता है तो किसानों, पशुपालकों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
प्रदूषण और अवरोध हटाने पर रहेगा जोर
नदी पुनरोद्धार योजना के तहत नदी में जमा गाद, कचरे और अन्य अवरोधों को हटाने की संभावना है।
इसके साथ ही नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
जल्द शुरू हो सकता है काम
सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अब सभी की नजर मंजूरी पर टिकी हुई है।
मंजूरी मिलते ही मालती नदी के पुनरोद्धार का काम शुरू कराया जाएगा।
प्रशासन का लक्ष्य है कि नदी को फिर से उपयोगी जल स्रोत बनाया जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित किया जा सके।