अयोध्या। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस बार अयोध्या में आयोजित होने वाले दसवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक और यादगार बनाने की तैयारियों में जुटी हुई है। भगवान श्रीराम की नगरी को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों, धार्मिक स्थलों, घाटों और चौराहों को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इस बार दीपोत्सव की सबसे खास बात यह होगी कि रामपथ के साथ अयोध्या के 41 प्रमुख मठ-मंदिरों और धार्मिक स्थलों को आकर्षक विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से रोशन किया जाएगा। श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद ने इसके लिए विशेष योजना तैयार की है। उद्देश्य यह है कि दीपोत्सव के दौरान रामनगरी की आध्यात्मिक पहचान, प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत को और अधिक आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप दीपोत्सव की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि इस वर्ष अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ऐसा अनुभव मिले, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक सजावट और भव्य सांस्कृतिक आयोजन की झलक दिखाई दे। इसके लिए सरयू तट से लेकर रामपथ तक विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की योजना के अनुसार, 41 प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उनकी आवश्यकता और संरचना के अनुरूप विद्युत झालरों की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक मंदिर की बनावट और आकार को ध्यान में रखते हुए लाइटिंग की संख्या तय की गई है। इससे मंदिरों की बाहरी संरचना और स्थापत्य विशेषताओं को रात के समय आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया जा सकेगा।
परिषद की कोशिश है कि पारंपरिक सजावट और आधुनिक प्रकाश तकनीक का ऐसा संयोजन किया जाए, जिससे मंदिरों की धार्मिक गरिमा भी बनी रहे। रंगीन झालरों और एलईडी लाइटों के माध्यम से इन स्थलों को विशेष स्वरूप दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, दीपोत्सव से पहले सभी निर्धारित स्थानों पर सजावट पूरी करने की योजना है।
रामनगरी में केवल मंदिरों को ही नहीं, बल्कि प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को भी आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रामपथ पर स्थित भवनों और बिजली के खंभों पर स्ट्रिप लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा धर्मपथ और अन्य प्रमुख मार्गों की रेलिंग तथा डिवाइडरों का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है।
रामपथ पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गेट नंबर 11 से लता मंगेशकर चौक तक सड़क के दोनों ओर की रेलिंग को फूलों से सजाने की योजना बनाई गई है। प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष सजावट की जाएगी। इससे दीपोत्सव के दौरान शहर का प्रमुख मार्ग आकर्षक रोशनी और फूलों की सजावट से जगमगाता दिखाई देगा।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नाका, देवकाली, महोबरा और बूथ नंबर चार सहित प्रमुख अंडरपास पर भी विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। मेला क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां पर्याप्त रोशनी की आवश्यकता है। इन स्थानों पर अतिरिक्त लाइट लगाने का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अयोध्या नगर निगम की ओर से भी दीपोत्सव को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों के साथ सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नगर निगम ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए पेयजल, शौचालय और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की योजना तैयार की है।
नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार के अनुसार, धार्मिक स्थलों की सजावट के लिए आवश्यक निविदा
प्रक्रिया
पूरी की जा रही है। प्रशासन ने मठ-मंदिरों के महंतों और व्यवस्थापकों से भी अपने धार्मिक स्थलों को दीपों से सजाने की अपील की है। इससे सरकारी व्यवस्थाओं के साथ धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो सकेगी।
इससे पहले नगर निगम की ओर से 50 से अधिक मठ-मंदिरों को एलईडी लाइटों से सजाने की व्यापक योजना की जानकारी दी गई थी। वहीं, श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद की विशेष सजावट योजना में 41 धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है। दोनों स्तरों पर हो रही तैयारियों से दीपोत्सव में धार्मिक स्थलों की भव्यता बढ़ने की उम्मीद है।
दसवें दीपोत्सव के मुख्य आयोजन की तैयारियां सरयू नदी के घाटों पर भी तेज हो गई हैं। राम की पैड़ी सहित कुल 56 घाटों पर दीप प्रज्वलित करने की योजना है। इसके लिए घाटों पर मार्किंग का काम शुरू किया जा चुका है। राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के हजारों स्वयंसेवकों की सहायता से घाटों पर दीप सजाने और उन्हें प्रज्वलित करने की व्यवस्था की जाएगी।
इस वर्ष दीपोत्सव के दौरान लगभग 30 लाख दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन की तैयारियों में लाखों लीटर तेल और बड़ी संख्या में बातियों की व्यवस्था भी शामिल है। प्रशासन के अनुसार, दीपों की सजावट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आकर्षणों की तैयारियां भी की जा रही हैं।
राम की पैड़ी पर विशेष मंच तैयार किया जाएगा, जहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। इसके अलावा रामकथा आधारित चित्रों और सजावट के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत करने की योजना है। प्रशासन का उद्देश्य दीपोत्सव को केवल दीप प्रज्वलन तक सीमित न रखकर अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के व्यापक उत्सव के रूप में आयोजित करना है।
दीपोत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अयोध्या पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन आवश्यक सुविधाओं पर भी ध्यान दे रहा है। नगर निगम की योजना के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर 30 मोबाइल शौचालय लगाए जाएंगे। शहर में पहले से मौजूद 471 बायो-टॉयलेट के साथ पेयजल के लिए वाटर कूलर, वाटर कियोस्क और अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है।
आयोजन के बाद साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए 792 सफाई कर्मचारियों और 55 कचरा प्रबंधन वाहनों की सहायता लेने की योजना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दीपोत्सव के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
दीपोत्सव का धार्मिक महत्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की परंपरा से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, भगवान राम के अयोध्या आगमन पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी धार्मिक भावना को जीवंत करने के उद्देश्य से रामनगरी में हर वर्ष भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है।
फिलहाल अयोध्या में दसवें दीपोत्सव की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रामपथ, प्रमुख मठ-मंदिरों, सरयू घाटों और सार्वजनिक स्थानों को सजाने का काम निर्धारित समय पर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इस बार 41 धार्मिक स्थलों की विशेष रोशनी, लाखों दीपों की जगमगाहट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से रामनगरी के आध्यात्मिक वैभव को भव्य स्वरूप देने की तैयारी है।
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