प्रयागराज। गंगापार क्षेत्र के होलागढ़ थाना अंतर्गत दुबेपुर सुल्तानपुर अकबर गांव निवासी 26 वर्षीय पुलिसकर्मी परितोष मिश्रा की बलिया में सड़क हादसे में मौत हो गई। परितोष मिश्रा उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात थे और उनकी पहली पोस्टिंग बलिया जिले में ही हुई थी। ड्यूटी से बांसडीह थाने लौटते समय 13 सितंबर की रात सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मंगलवार देर रात शव बलिया से पैतृक गांव लाया गया। बुधवार सुबह शृंगवेरपुर घाट पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परितोष मिश्रा के निधन की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के साथ ग्रामीण और परिचित भी बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में शामिल हुए। परितोष के सहकर्मी पुलिसकर्मी भी इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं।
2025 बैच के सिपाही थे परितोष
दुबेपुर सुल्तानपुर अकबर गांव निवासी परितोष मिश्रा पुत्र रमाकांत मिश्रा वर्ष 2025 बैच के सिपाही थे। पुलिस विभाग में चयन के बाद उन्होंने बलिया में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पहली तैनाती भी बलिया जिले में ही हुई। वह बांसडीह थाने में सिपाही के रूप में तैनात थे।
परितोष के परिवार और ग्रामीणों के मुताबिक, पुलिस की नौकरी मिलने के बाद वह बेहद उत्साहित थे। पहली पोस्टिंग अपने प्रशिक्षण स्थल वाले जिले में ही मिलने से परिवार में भी खुशी का माहौल था। कम उम्र में ही उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी सेवा शुरू की थी, लेकिन नौकरी के शुरुआती दौर में ही हुए हादसे ने परिवार को गहरा सदमा दिया।
ड्यूटी से थाने लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, 13 सितंबर की रात परितोष मिश्रा ड्यूटी पर तैनात थे। देर रात ड्यूटी पूरी करने के बाद वह बांसडीह थाने की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनका सड़क हादसा हो गया। हादसा किस वाहन से और किन परिस्थितियों में हुआ, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की जा रही है।
हादसे के बाद पुलिस को इसकी जानकारी मिली और परितोष को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की सूचना पुलिस विभाग के अधिकारियों और उनके परिजनों को दी गई। जवान की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।
सुबह फोन करने पर नहीं मिला जवाब
बताया गया कि परितोष 13 सितंबर की रात ड्यूटी के लिए निकले थे। देर रात तक जब वह थाने वापस नहीं पहुंचे तो साथी पुलिसकर्मियों को चिंता हुई। 14 सितंबर की सुबह करीब छह बजे उनके साथियों ने मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया।
साथी पुलिसकर्मियों ने कई बार फोन किया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद हादसे की जानकारी सामने आई और पता चला कि सड़क दुर्घटना में परितोष की मौत हो चुकी है।
परितोष के निधन की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में भी यह खबर तेजी से फैल गई। ग्रामीण बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचने लगे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।
देर रात गांव पहुंचा शव
हादसे के बाद आवश्यक पुलिस कार्रवाई और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परितोष का शव बलिया से उनके पैतृक गांव लाया गया। 14 सितंबर की देर रात शव गांव पहुंचा। शव के पहुंचते ही परिवार में मातम और गहरा गया।
परिजनों ने बताया कि जिस बेटे को उन्होंने पुलिस की वर्दी में देश और प्रदेश की सेवा करते देखने का सपना संजोया था, वह इतनी कम उम्र में दुनिया छोड़ गया। गांव के लोगों के लिए भी परितोष की मौत बेहद दुखद रही।
शृंगवेरपुर घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार सुबह परितोष मिश्रा का अंतिम संस्कार शृंगवेरपुर घाट पर किया गया। अंतिम यात्रा में परिवार, रिश्तेदारों, ग्रामीणों और परिचितों के अलावा पुलिस विभाग से जुड़े लोग भी शामिल हुए। गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परितोष की मौत से गांव में हर कोई दुखी नजर आया। ग्रामीणों ने बताया कि वह मिलनसार स्वभाव के थे और नौकरी मिलने के बाद भी अपने गांव और परिचितों से जुड़े रहते थे। कम उम्र में सरकारी सेवा हासिल करने के बाद परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
परितोष मिश्रा की मौत से उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जवान बेटे की असमय मौत ने परिवार को झकझोर दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
वहीं, पुलिस विभाग में भी उनके निधन को लेकर शोक का माहौल है। वर्ष 2025 बैच के युवा सिपाही के रूप में परितोष ने अपने करियर की शुरुआत की थी। पहली पोस्टिंग के दौरान ही सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई।
सड़क हादसे में एक युवा पुलिसकर्मी की जान चले जाने की घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल हादसे से जुड़े कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। परिवार और गांव के लोग अब इस दुखद घटना से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 26 वर्षीय परितोष की असमय मौत ने उनके पीछे एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भर पाना परिवार के लिए आसान नहीं होगा।