प्रतापगढ़: जनपद के ग्रामीण अंचलों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विभाग के माध्यम से अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं जिससे ग्रामीणों को रोजगार का अवसर मिल सके ताकि वह परिवार को खुशहाल बना सकें। इस उद्देश्य के तहत प्रदेश के अनेक जनपदों में मत्स्य पालक विकास अभिकरण की स्थापना कर ग्रामीण अंचलों में अनुपयोगी पोखरों और तालाबों का आवंटन उपजिलाधिकारी द्वारा करवा कर तालाब सुधार और प्रथम वर्ष निवेश हेतु बैंक द्वारा मत्स्यपालकों को क्षेत्रफल के अनुसार ऋण एवं अनुदान बैंक द्वारा मुहैया कराये जाने का प्रावधान है जिससे मत्स्यपालक लाभान्वित होते रहते हैं जो बेरोजगारों के लिए वरदान साबित होता रहा परंतु विगत लगभग 4 वर्षों से यह योजना निरंतर फ्लॉप होती नजर आ रही है जिसके दो कारण है - विभाग के कर्मचारियों की संख्या अत्यंत न्यून है और दूसरी बात है कि वर्तमान में मत्स्य अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विकास कुमार दीपांकर अपने पद एवं दायित्व का निर्वहन सुनियोजित ढंग से नहीं कर पा रहे हैं जिसकी वजह से विभाग पतन की ओर जा रहा है।
बस किसी तरह खाना पूर्ति हो रही है और लक्ष्य पूर्ति में भी कागज पर आंकड़ों का खेला जारी रखते हुए महीना पार किया जाता है जिससे पगार मिल जाय। बताते चलें कि लगभग तीन वर्ष पूर्व में निवर्तमान सीडीओ ने इन्हीं मत्स्य अधिकारी के विरुद्ध कई बार विभागीय कार्यवाही की थीं जो ठंढ़े बस्ते में चली गई और मत्स्य अधिकारी के विरुद्ध पूर्व में कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई जो आज भी कोढ़ में खाज के रूप में बना है। सूचना विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 11सितम्बर को डीएम ने सीएम डैश बोर्ड की समीक्षा बैठक किया था जिसमें नौ विभागों की खराब रैंकिंग थी जिसमें मत्स्य विभाग भी था। मत्स्य विभाग की योजनाओं में लापरवाही एवं उदासीनता बरते जाने पर डीएम ने मत्स्य अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और मत्स्य अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हेतु पत्र भेजने का निर्देश दिया था जिसके फलस्वरूप मत्स्य अधिकारी के माह सितम्बर का वेतन बाधित कर दिया गया लेकिन मत्स्य अधिकारी की मानसिकता को देखते हुए माना जा सकता है कि वह अब बैठकों में डांट और फटकार सुनने के लिए अभ्यस्त हो चुके हैं, तभी वह मस्त हैं इसलिए कि यह वही अधिकारी हैं जो दो माह पूर्व अपने विभागीय लाव लश्कर के साथ मत्स्यकीय दिवस मुख्यालय पर न मना कर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर बेल्हा मत्स्य प्रक्षेत्र पर जाकर 11 मत्स्यपालकों को प्रशिक्षण दिया जबकि जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके द्वारा दी गई सूचनानुसार 42 लाभार्थियों ने प्रतिभाग किया था जो सरासर गलत था।
पता तो यह भी चला है कि मत्स्य अधिकारी विकास कुमार दीपांकर को नोटशीट प्रस्तुत करना भी नहीं आता और प्रायः भ्रामक तथ्य उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। ऐसा कुछ दृष्टांत सामने आया कि लगभग एक माह पूर्व निषादराज बोट सब्सिडी योजना अंतर्गत एक बैठक सीडीओ द्वारा आहूत की गई थी जिसमें समिति के माध्यम से प्रस्ताव अनुमोदित किया जाना था परंतु मत्स्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव त्रुटि पूर्ण लगी जिसकी वजह से सीडीओ ने मत्स्य अधिकारी के अगस्त माह के वेतन को बाधित कर दिया था। इस बात की जानकारी हेतु मत्स्य अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की मीटिंग में खराब प्रगति के कारण सितंबर माह का ही वेतन बाधित किया गया है और किसी माह का वेतन बाधित नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि माह अगस्त का वेतन मत्स्य अधिकारी के पक्ष में आहरित हो गया जिसे सीडीओ ने बाधित किया था। मत्स्य अधिकारी ने खुद का माह अगस्त का वेतन अभियाचन उपनिदेशक मत्स्य ,प्रयागराज मंडल, प्रयागराज को भेज कर आहरित कर लिया होगा। कहा जाता है कि हर काम संभव है बस जुगाड़ होना चाहिए।