लखनऊ। बहुचर्चित एपल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने फैसला सुनाया। सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह की अदालत ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

इससे पहले 17 सितंबर को अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि घटना के पीछे पहले से हत्या करने की योजना या उद्देश्य साबित नहीं हुआ। अदालत के अनुसार, घटना अचानक हुई थी, इसलिए आरोपी को हत्या की श्रेणी में दोषी नहीं माना जा सकता।

सह आरोपी संदीप कुमार हुआ बरी

मामले में सह अभियुक्त संदीप कुमार को अदालत से राहत मिली है। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना और संदीप कुमार को बरी करने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि संदीप के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर उसे दोषमुक्त कर दिया गया।

आठ साल से जेल में बंद है प्रशांत

प्रशांत चौधरी पिछले करीब आठ साल से जेल में बंद है। अदालत के फैसले के बाद अब उसकी सजा की अवधि तय हो गई है।

विवेक तिवारी हत्याकांड प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल रहा है और इस मामले की सुनवाई पर लंबे समय से लोगों की नजर बनी हुई थी।

28 सितंबर 2018 की रात हुई थी घटना

यह मामला 28 सितंबर 2018 की रात का है। उस समय एपल कंपनी में एरिया मैनेजर के पद पर कार्यरत विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे।

घटना लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में हुई थी। आरोपों के अनुसार, गोमतीनगर विस्तार इलाके में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने कार को रोकने का प्रयास किया था।

इसी दौरान हुई घटना में विवेक तिवारी को गोली लग गई थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।

घटना के बाद मचा था हड़कंप

विवेक तिवारी की मौत के बाद पूरे प्रदेश में मामला चर्चा का विषय बन गया था। घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।

मामले की जांच के बाद प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। प्रशांत चौधरी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

अदालत ने माना अचानक हुई थी घटना

अदालत ने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि प्रशांत चौधरी ने पहले से विवेक तिवारी की हत्या करने की योजना बनाई थी।

न्यायालय ने माना कि घटना अचानक हुई थी और इसी आधार पर आरोपी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना गया।

फैसले पर बनी रही थी नजर

लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। सोमवार को फैसला आने के बाद जहां प्रशांत चौधरी को सजा सुनाई गई, वहीं संदीप कुमार को बरी कर दिया गया।

विवेक तिवारी हत्याकांड ने पुलिस व्यवस्था, ड्यूटी के दौरान हथियारों के इस्तेमाल और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा शुरू की थी।

अदालत के इस फैसले के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब प्रशांत चौधरी को सुनाई गई 10 साल की सजा और जुर्माने के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Tags: