नेपाल त्रासदी में बहकर आए नौ शवों का पोस्टमार्टम पूरा कुशीनगर पुलिस ने नेपाल भेजे शव
गोरखपुर/कुशीनगर। नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद नारायणी नदी के रास्ते भारत पहुंचे नौ शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। बुधवार को एम्स गोरखपुर में रखे चार और शवों का पोस्टमार्टम किया गया। इसके साथ ही सभी नौ शवों की चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी हो गई और शवों को कुशीनगर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
कुशीनगर पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी शवों को नेपाल भेज दिया है। शवों के हटने के बाद अब एम्स गोरखपुर में नेपाल त्रासदी से जुड़ा एक भी शव मौजूद नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से पूरा किया गया।
जानकारी के मुताबिक नेपाल में आई भीषण आपदा के दौरान कई लोग प्रभावित हुए थे। इसी त्रासदी के बीच नारायणी नदी के तेज बहाव में कुछ शव बहकर भारत की सीमा तक पहुंच गए थे। कुशीनगर क्षेत्र में नदी के रास्ते पहुंचे इन शवों को बाद में पोस्टमार्टम के लिए एम्स गोरखपुर भेजा गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने शवों के पोस्टमार्टम के लिए विशेष व्यवस्था की थी। नेपाल से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पहचान, चिकित्सकीय जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया।
एम्स में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तीन दिनों में पूरी की गई। सोमवार को पहले चरण में दो शवों का पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद मंगलवार को तीन शवों की चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई। बुधवार को शेष चार शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद सभी नौ शवों की प्रक्रिया पूरी हो गई।
पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सकों की टीम ने आवश्यक जांच पूरी की। इसके बाद शवों को सुरक्षित तरीके से पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने पहचान और अन्य जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शवों को नेपाल भेजने की व्यवस्था की।
नेपाल त्रासदी से जुड़े शवों की प्रक्रिया पूरी करना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी। इसमें भारत और नेपाल दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय की आवश्यकता थी। शवों को उनके परिजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
नारायणी नदी नेपाल और भारत दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण नदी है। बारिश और आपदा की स्थिति में नदी का जलस्तर बढ़ने से कई बार गंभीर परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। इस बार भी भीषण त्रासदी के बाद नदी के रास्ते शव भारत की सीमा तक पहुंचे।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शवों को सुरक्षित तरीके से संभाला। इसके बाद उन्हें गोरखपुर एम्स भेजा गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पोस्टमार्टम किया गया।
एम्स प्रशासन ने इस दौरान अतिरिक्त व्यवस्था की थी ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की देरी न हो। चिकित्सकों और कर्मचारियों की टीम ने लगातार काम करते हुए तीन दिनों में सभी शवों की जांच पूरी कर ली।
कुशीनगर पुलिस की भूमिका भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने शवों को एम्स तक पहुंचाने से लेकर पोस्टमार्टम के बाद नेपाल भेजने तक की जिम्मेदारी संभाली। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शवों को नेपाल रवाना किया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अब एम्स गोरखपुर में नेपाल त्रासदी से संबंधित कोई शव नहीं बचा है। सभी शवों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेज दिया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर आपदा के समय सीमा पार समन्वय की जरूरत को सामने रखा है। नेपाल और भारत के बीच बेहतर तालमेल के कारण शवों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
स्थानीय प्रशासन ने भी आपदा की स्थिति में सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और आपदा के प्रभाव को देखते हुए राहत और बचाव से जुड़े तंत्र को सक्रिय रखा जाता है।
नेपाल में आई त्रासदी से प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव कार्य अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं भारत पहुंचे शवों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब परिजनों तक उन्हें पहुंचाने का काम पूरा किया जा चुका है।
नौ शवों के पोस्टमार्टम और नेपाल भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एम्स गोरखपुर और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। संवेदनशील मामले को बिना किसी बड़ी बाधा के पूरा किया गया।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। नारायणी नदी के रास्ते कुशीनगर पहुंचे सभी शव अब नेपाल भेजे जा चुके हैं और एम्स परिसर भी इस त्रासदी से जुड़े शवों से मुक्त हो गया है।