Omprakash Rajbhar का बयान, अखिलेश यादव पर तीखा तंज

Update: 2026-06-25 13:05 GMT

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में मंत्री Omprakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव को भारतीय राजनीति का “राजाबाबू” बताते हुए उनकी नीतियों और बयानों पर सवाल उठाए हैं।

लखनऊ में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल गर्म है। इसी बीच ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा प्रमुख पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक हितों के अनुसार PDA की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते रहते हैं।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव कभी PDA में P का मतलब पिछड़ा, D का दलित और A का अल्पसंख्यक बताते हैं, तो कभी A को आदिवासी, अगड़ा या आधी आबादी से जोड़ देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और सामाजिक न्याय के दावों पर सवाल उठते हैं।

PDA को लेकर राजनीतिक विवाद

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लंबे समय से PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा देते आ रहे हैं। लेकिन विपक्षी दल लगातार उन पर आरोप लगाते हैं कि वे समय-समय पर PDA की परिभाषा बदलते रहते हैं। राजभर ने भी इसी मुद्दे को लेकर हमला तेज किया है।

राजभर ने अपने बयान में यहां तक कहा कि PDA में A को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं, जिससे राजनीतिक भ्रम फैलता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कटाक्ष करते हुए कहा कि कभी A का मतलब आदिवासी, कभी अगड़ा और कभी अन्य वर्गों से जोड़ा जाता है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी बयानबाजी

ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली उन्हें बॉलीवुड फिल्म “राजा बाबू” के किरदार की याद दिलाती है, जिसमें नायक अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आता है। इसी संदर्भ में उन्होंने अखिलेश यादव को “राजाबाबू” कहकर संबोधित किया।

राजभर ने यह भी दावा किया कि सपा सरकार के कार्यकाल में कुछ मामलों में आतंकवाद से जुड़े मुकदमों को वापस लेने जैसे फैसले लिए गए थे, जिनको लेकर भी राजनीतिक विवाद रहा है।

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है। राजभर के इस बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। वहीं सपा की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में ऐसे बयान और तेज हो सकते हैं, क्योंकि सभी दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटे हैं।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि यूपी की राजनीति में PDA और सामाजिक समीकरणों को लेकर संघर्ष लगातार जारी है और चुनावी माहौल के साथ यह और भी तीखा होता जा रहा है।

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