रामपुर। केंद्र सरकार आम बजट 2026-27 में घोषित रेल आधारित माल ढुलाई को बढ़ावा देने की योजना पर जल्द अमल शुरू करने की तैयारी में है। इस पहल के तहत रेलवे कारोबारियों तक सीधे पहुंच बनाकर उनकी जरूरतों के अनुसार माल परिवहन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। व्यापारियों को पार्सल वैन, मिनी रैक और रियायती दरों पर माल बुकिंग जैसी सुविधाएं देने की तैयारी की जा रही है। रेलवे की इस योजना से परिवहन लागत कम होने की उम्मीद है। इसका विशेष लाभ मेंथा निर्यातकों और लकड़ी कारोबारियों को मिल सकता है। संबंधित जिले से हर साल करीब 1750 करोड़ रुपये मूल्य के मेंथा उत्पादों का विदेशों में निर्यात किया जाता है।

बजट में घोषित योजना पर अमल की तैयारी

आम बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने रेलवे के माध्यम से माल ढुलाई को प्रोत्साहित करने की योजना का उल्लेख किया था।

अब रेलवे इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। योजना का उद्देश्य व्यापारियों को सड़क परिवहन के साथ रेल परिवहन का किफायती विकल्प उपलब्ध कराना है।

इसके लिए रेलवे कारोबारियों की जरूरतों को समझकर माल बुकिंग की व्यवस्था विकसित करना चाहता है।

इस पहल के लागू होने से छोटे और बड़े व्यापारियों को अपनी जरूरत के अनुसार रेल सेवाओं का उपयोग करने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, योजना लागू होने की निश्चित तारीख और विस्तृत दिशा-निर्देश अभी स्पष्ट नहीं हैं।

व्यापारियों तक सीधे पहुंचेगा रेलवे

रेलवे की प्रस्तावित व्यवस्था की खास बात कारोबारियों से सीधे संपर्क स्थापित करना है।

इसके तहत व्यापारियों की माल ढुलाई संबंधी जरूरतों का आकलन किया जाएगा।

कारोबारियों को किस प्रकार के परिवहन की आवश्यकता है, कितना माल भेजना है और किन स्थानों तक माल पहुंचाना है, जैसे विषय महत्वपूर्ण होंगे।

इसी आधार पर पार्सल वैन और मिनी रैक जैसी सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

इससे उन व्यापारियों को भी लाभ मिल सकता है, जिनके पास पूरी मालगाड़ी के बराबर सामान नहीं होता।

पार्सल वैन और मिनी रैक की सुविधा

रेलवे व्यापारियों की मांग के अनुसार पार्सल वैन और मिनी रैक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।

पार्सल वैन के जरिए अपेक्षाकृत कम मात्रा में सामान भेजने का विकल्प मिल सकता है।

वहीं, मिनी रैक की व्यवस्था उन कारोबारियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें अधिक मात्रा में माल भेजना होता है, लेकिन पूरी रैक की आवश्यकता नहीं होती।

इससे विभिन्न स्तर के व्यापारियों को रेल परिवहन से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित सुविधाओं के लिए न्यूनतम माल की मात्रा और बुकिंग संबंधी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं।

सड़क के मुकाबले रेल से ढुलाई सस्ती

रेलवे मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क मार्ग से माल ढुलाई की औसत लागत लगभग 3.60 रुपये प्रति टन-किलोमीटर बताई गई है।

इसके मुकाबले रेल से माल ढुलाई की लागत करीब 1.60 रुपये प्रति टन-किलोमीटर है।

इस प्रकार दोनों परिवहन माध्यमों की लागत में लगभग दो रुपये प्रति टन-किलोमीटर का अंतर है।

माल ढुलाई की बताई गई औसत लागत

सड़क मार्ग

₹3.60

प्रति टन-किलोमीटर

रेल मार्ग

₹1.60

प्रति टन-किलोमीटर

यह अंतर बड़े पैमाने पर माल भेजने वाले कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, वास्तविक खर्च में माल चढ़ाने-उतारने, स्थानीय परिवहन और अन्य शुल्क भी शामिल हो सकते हैं।

रियायती दरों पर माल बुकिंग की तैयारी

रेलवे कारोबारियों को रियायती दरों पर माल बुकिंग की सुविधा देने की भी तैयारी कर रहा है।

इसका उद्देश्य रेल परिवहन को व्यापारियों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

यदि माल बुकिंग की दरें प्रतिस्पर्धी होती हैं, तो अधिक व्यापारी सड़क के बजाय रेलवे से सामान भेजने पर विचार कर सकते हैं।

इससे रेलवे को भी माल ढुलाई का कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित रियायत कितनी होगी और किन वस्तुओं पर लागू होगी, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

मेंथा निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा

रेलवे की इस पहल से मेंथा कारोबार से जुड़े निर्यातकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संबंधित जिले से हर साल लगभग 1750 करोड़ रुपये मूल्य के मेंथा उत्पादों का विदेशों में निर्यात किया जाता है।

वर्तमान में इन उत्पादों को लॉजिस्टिक व्यवस्था के माध्यम से भेजा जाता है।

यदि रेलवे निर्यातकों की जरूरत के अनुसार किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराता है, तो माल भेजने की लागत कम हो सकती है।

इससे निर्यातकों को अपने कारोबार की परिवहन व्यवस्था बेहतर बनाने का अवसर मिल सकता है।

लकड़ी कारोबारियों के लिए भी अवसर

मेंथा निर्यातकों के अलावा लकड़ी कारोबारियों को भी इस योजना से लाभ मिलने की संभावना है।

लकड़ी का परिवहन कई बार अधिक मात्रा और वजन के कारण खर्चीला हो सकता है।

ऐसे में रेल मार्ग से माल भेजने का विकल्प कारोबारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

हालांकि, लकड़ी के परिवहन में वस्तु की प्रकृति, पैकिंग, लोडिंग और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक होगा।

रेलवे की नई व्यवस्था में लकड़ी कारोबारियों के लिए कौन-सी विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी, इसका विवरण अभी सामने नहीं आया है।

निर्यात कारोबार को मिल सकती है मजबूती

माल ढुलाई की लागत किसी भी निर्यात कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उत्पाद तैयार होने के बाद उसे गोदाम, प्रसंस्करण केंद्र, बंदरगाह या अन्य परिवहन केंद्र तक पहुंचाने में खर्च होता है।

यदि इस प्रक्रिया में रेल परिवहन का उपयोग बढ़ता है, तो कुछ मार्गों पर लागत कम करने की संभावना बन सकती है।

मेंथा निर्यातकों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे उनके माल की मात्रा, गंतव्य और समय संबंधी जरूरतों के अनुरूप सेवा दे सके।

सुविधा का वास्तविक लाभ योजना लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

कारोबारियों की मांग के अनुसार बनेगी व्यवस्था

रेलवे की प्रस्तावित योजना में व्यापारियों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है।

इससे माल ढुलाई की सेवाओं को स्थानीय उद्योगों और कारोबार के अनुरूप विकसित करने का अवसर मिल सकता है।

छोटे व्यापारियों के लिए पार्सल वैन और अधिक माल भेजने वालों के लिए मिनी रैक जैसे विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

हालांकि, इन सुविधाओं की उपलब्धता संबंधित रेलवे स्टेशन, मार्ग और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

इसलिए प्रत्येक कारोबारी को समान सुविधा मिलने की पुष्टि अभी नहीं की जा सकती।

रेलवे और व्यापारियों दोनों को फायदा संभव

यदि अधिक व्यापारी रेल मार्ग से माल भेजना शुरू करते हैं, तो रेलवे की माल ढुलाई गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है।

वहीं, कारोबारियों को परिवहन खर्च घटाने और माल भेजने के नए विकल्प मिल सकते हैं।

रेल परिवहन की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होने से लंबी दूरी की माल ढुलाई में लाभ मिलने की संभावना रहती है।

हालांकि, प्रस्तावित योजना से रेलवे की आय कितनी बढ़ेगी या कारोबारियों को कुल कितनी बचत होगी, इसका कोई आधिकारिक अनुमान उपलब्ध नहीं है।

योजना लागू होने का इंतजार

रेलवे की नई पहल से कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कई महत्वपूर्ण बातें अभी स्पष्ट होना बाकी हैं।

इनमें बुकिंग की दरें, रियायतों की शर्तें, पार्सल वैन और मिनी रैक की उपलब्धता तथा योजना शुरू होने की तारीख शामिल हैं।

इन जानकारियों के सामने आने के बाद व्यापारी अपनी परिवहन जरूरतों के अनुसार निर्णय ले सकेंगे।

रेलवे मंत्रालय की रिपोर्ट में सड़क के मुकाबले रेल से माल ढुलाई की औसत लागत कम बताई गई है। ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर मेंथा निर्यातकों और लकड़ी कारोबारियों को किफायती परिवहन का नया विकल्प मिल सकता है।

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