कासगंज: वृद्धाश्रम में रह रही शांति देवी के निधन के बाद परिवार का कोई सदस्य अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद मानव सेवा समिति ने उनकी अंतिम विदाई की व्यवस्था की। शांति देवी वर्ष 2019 से कासगंज के वृद्धाश्रम में रह रही थीं। करीब दो महीने पहले गिरने से उनका कूल्हा टूट गया था और उपचार चल रहा था। शुक्रवार रात उनका निधन हो गया।
आश्रम प्रबंधन के अनुसार, मौत की सूचना देने के लिए परिवार से संपर्क किया गया। बरेली में रहने वाली बेटी का मोबाइल बंद मिला। दूसरी बेटी के पति गोपाल से बातचीत हुई तो उसने आने से इनकार कर दिया। प्रबंधन का आरोप है कि उसने कहा, ‘‘कहीं भी फेंक दो लाश, हमसे कोई मतलब नहीं।’’
रिपोर्ट के मुताबिक, पति नरोत्तम राजपूत की मृत्यु के बाद शांति देवी अकेली पड़ गई थीं। आरोप है कि वर्ष 2018 में मकान बेचकर रकम बेटियों और दामादों ने बांट ली तथा बाद में उन्हें घर से निकाल दिया। लावारिस हालत में मिलने पर उन्हें पहले एटा के वृद्धाश्रम पहुंचाया गया था।
इन आरोपों पर बेटियों और संबंधित दामाद का विस्तृत पक्ष उपलब्ध रिपोर्ट में सामने नहीं आया है।
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