उन्नाव में झुलसे अधेड़ की मौत, पत्नी पर आरोप

Update: 2026-07-24 03:54 GMT

उन्नाव : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बारासगवर थाना क्षेत्र के धानीखेड़ा गांव निवासी 58 वर्षीय अधेड़ की आग से गंभीर रूप से झुलसने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। मौत से पहले दिए गए अपने बयान में उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी पर आग लगाकर जान से मारने का आरोप लगाया था। मृतक के बयान के आधार पर पुलिस ने पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोग घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान धानीखेड़ा गांव निवासी हृदयेश तिवारी (58) के रूप में हुई है। वह आग से गंभीर रूप से झुलस गए थे और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

पुलिस ने बताया कि अस्पताल में उपचार के दौरान हृदयेश तिवारी का बयान दर्ज किया गया था। इस बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी दूसरी पत्नी ने उन पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गए। पुलिस ने इस बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मृतक की बेटी सोनम ने बताया कि उनकी मां रजनी का वर्ष 2023 में बीमारी के कारण निधन हो गया था। मां की मृत्यु के बाद पिता अकेले रहने लगे थे। करीब दो वर्ष पहले उन्होंने नवाबगंज निवासी रानू से कोर्ट मैरिज की थी और दोनों साथ रहने लगे थे। परिवार के अनुसार, विवाह के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में पति-पत्नी के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर विवाद होने लगे थे।

सोनम ने बताया कि लगभग तीन माह पहले उनके पिता ने शिवनगर स्थित अपना मकान बेच दिया था। इसके बाद उन्होंने तुजरियाबाग मोहल्ले में नया मकान बनवाया और वहीं अपनी दूसरी पत्नी रानू के साथ रहने लगे। परिवार का कहना है कि संपत्ति और घरेलू मामलों को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होती थी। हालांकि, घटना वाले दिन वास्तव में क्या हुआ, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मृतक के अंतिम बयान के आधार पर पुलिस ने उनकी पत्नी रानू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की सत्यता की पुष्टि के लिए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हृदयेश तिवारी अपने क्षेत्र में सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया था। हालांकि, हाल के महीनों में पति-पत्नी के बीच विवाद की चर्चाएं सुनने को मिलती थीं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और चिंता का माहौल है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में मृतक द्वारा उपचार के दौरान दिया गया बयान, जिसे मृत्युपूर्व कथन (डाइंग डिक्लेरेशन) कहा जाता है, न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय उपलब्ध सभी साक्ष्यों, परिस्थितियों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही करता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच अत्यंत आवश्यक है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम कराया गया है और उसकी रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।

परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि हृदयेश तिवारी ने मृत्यु से पहले जो आरोप लगाए थे, उनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा।

फिलहाल इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक परिवार, जिसने पहले ही पत्नी और मां को खो दिया था, अब परिवार के मुखिया की भी मौत से गहरे सदमे में है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी और उसी के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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