आगरा : डायबिटीज यानी मधुमेह आज देश में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतों और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग ब्लड शुगर की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में एक मेडिकल कॉलेज की स्टडी में दावा किया गया है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले आटे में बदलाव करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दवाएं बंद करने का फैसला केवल डॉक्टर की सलाह से ही लिया जाना चाहिए।
स्टडी में बताया गया कि सामान्य गेहूं के आटे की जगह अधिक फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले अनाजों को भोजन में शामिल करने से शुगर लेवल को नियंत्रित करने में फायदा मिल सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए ऐसा भोजन बेहतर माना जाता है जो धीरे-धीरे ग्लूकोज बढ़ाए और शरीर में इंसुलिन के बेहतर इस्तेमाल में मदद करे।
आटे में बदलाव क्यों जरूरी?
भारत में ज्यादातर घरों में गेहूं के आटे से बनी रोटी रोजाना खाई जाती है। गेहूं में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन के बाद ग्लूकोज में बदल जाता है। डायबिटीज मरीजों के लिए ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आटे में ऐसे अनाज शामिल किए जाएं जिनमें फाइबर ज्यादा हो तो खाना धीरे पचता है और शुगर अचानक बढ़ने की संभावना कम हो सकती है।
कौन-कौन से आटे फायदेमंद हो सकते हैं?
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए कई लोग मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल करते हैं। इसमें गेहूं के साथ अलग-अलग अनाज मिलाए जाते हैं।
1. जौ का आटा
जौ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। यह पाचन प्रक्रिया को धीमा करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस करा सकता है।
2. रागी का आटा
रागी में कैल्शियम और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह भी कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले अनाजों में गिना जाता है।
3. बाजरे का आटा
बाजरा फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सर्दियों में इसका सेवन कई लोग करते हैं।
4. चने का आटा
चना प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसे गेहूं के आटे में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि हर व्यक्ति की डायबिटीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है।
स्टडी में क्या दावा किया गया?
मेडिकल कॉलेज की स्टडी में यह देखने की कोशिश की गई कि खानपान में छोटे बदलावों से डायबिटीज मरीजों के स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने अपने आहार में फाइबर युक्त आटे और संतुलित भोजन को शामिल किया, उनमें ब्लड शुगर नियंत्रण में सुधार देखा गया।
शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज सिर्फ दवा से नहीं बल्कि जीवनशैली में बदलाव से भी नियंत्रित की जा सकती है। सही खानपान, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या सच में दवाएं बंद हो सकती हैं?
डायबिटीज की दवाएं छोड़ने को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह हर मरीज के लिए संभव नहीं होता।
कुछ लोगों में वजन कम होने, बेहतर खानपान और नियमित व्यायाम से शुगर लेवल इतना नियंत्रित हो सकता है कि डॉक्टर दवा की मात्रा कम कर सकते हैं। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है।
अगर मरीज अचानक दवा बंद कर देता है तो ब्लड शुगर बढ़ सकता है और इससे आंखों, किडनी, हृदय और नसों पर असर पड़ सकता है।
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए सिर्फ आटा बदलना काफी नहीं
आटे में बदलाव के साथ-साथ कई अन्य आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
* रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
* मीठे और ज्यादा तले हुए खाद्य पदार्थों से बचें।
* खाने का समय नियमित रखें।
* पर्याप्त नींद लें।
* वजन को नियंत्रित रखें।
* समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।
स्वस्थ भोजन योजना में सब्जियां, फाइबर युक्त अनाज, दालें और संतुलित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
डायबिटीज मरीजों के लिए रोटी कितनी खानी चाहिए?
यह हर व्यक्ति की उम्र, वजन, शुगर लेवल और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। कुछ लोगों के लिए दो रोटी पर्याप्त हो सकती हैं, जबकि कुछ को इससे कम या ज्यादा की जरूरत हो सकती है।
इसलिए केवल इंटरनेट पर बताए गए नियमों के आधार पर अपनी डाइट तय नहीं करनी चाहिए।
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