लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं समेत कई जनहित के मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। मायावती ने सोमवार को सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विभिन्न विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर पेपरलीक और भ्रष्टाचार से मुक्त भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया रोकनी चाहिए और बेरोजगार युवाओं के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि देश और प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन इन पदों पर समयबद्ध तरीके से निष्पक्ष भर्ती नहीं हो पा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि रिक्त पदों को भरने के लिए ऐसी भर्ती व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें पेपरलीक और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता की जरूरत है।
बसपा सुप्रीमो ने अपनी सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान पुलिस और पंचायती राज विभाग में करीब सवा दो लाख नए सरकारी पद सृजित किए गए थे। उनके मुताबिक, भर्ती पर लगी रोक हटाकर सर्वसमाज के लाखों लोगों को सरकारी नौकरियों में नियुक्ति का अवसर दिया गया था। मायावती ने इसे रोजगार के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करते हुए मौजूदा सरकारों से भी इसी तरह रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, पंजाब और अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोग महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से परेशान हैं। उन्होंने अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पलायन, महिला असुरक्षा, पेपरलीक और भ्रष्टाचार को भी गंभीर समस्याओं में शामिल किया। उनका कहना है कि इन मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से बार-बार प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है, लेकिन जनता को अभी तक इन समस्याओं से अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
बसपा प्रमुख ने सरकार से राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया रोकने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों और राष्ट्रीय संपत्तियों को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि देश के संसाधनों का इस्तेमाल व्यापक जनहित में किया जा सके। साथ ही उन्होंने सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती को प्राथमिकता देने की बात कही।
मायावती ने संसद के मौजूदा सत्र में जारी गतिरोध को खत्म करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में लगातार चल रहा गतिरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की चर्चा के लिए उचित नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार और विपक्ष दोनों को जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन को सुचारु रूप से चलाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
अपने बयान में मायावती ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरक्षण सामाजिक रूप से शोषित और वंचित वर्गों का अधिकार है। मायावती के मुताबिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण केवल रोजगार या शिक्षा का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
मायावती ने आरक्षण के राजनीतिकरण के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने की सलाह देना उन वर्गों के हितों के विपरीत है, जिन्हें संविधान के तहत आरक्षण का अधिकार मिला है। उन्होंने आरएसएस से आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति नहीं करने और इसमें किसी तरह के बदलाव की वकालत से बचने की बात कही।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आरक्षण से जुड़े फैसलों का सीधा असर समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों पर पड़ता है। इसलिए इस मुद्दे पर किसी भी तरह की टिप्पणी या बदलाव को संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक न्याय की भावना को ध्यान में रखकर ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किए जाने से इसका उद्देश्य कमजोर हो रहा है।
कुल मिलाकर मायावती ने बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी भर्ती, भ्रष्टाचार, पेपरलीक, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और आरक्षण जैसे मुद्दों को एक साथ उठाकर केंद्र और राज्य सरकारों से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकारी नौकरियों में पारदर्शी भर्ती, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और जनहित से जुड़े मुद्दों के समाधान को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।