मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करने की दशकों पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है। मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान वकीलों ने हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। बाद में वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की जरूरत को लेकर अपनी दलीलें रखीं। अधिवक्ता पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई कोर्ट बेंच की स्थापना करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है और उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से असंतुष्ट वकीलों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही है।

मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे वकील

मेरठ में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति से जुड़े अधिवक्ता उनसे मुलाकात करना चाहते थे। वकील अपनी मांग को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए एकत्र हुए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस और प्रशासन ने शुरुआत में अधिवक्ताओं को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद नोकझोंक और विरोध की स्थिति बनी। बाद में नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई।

इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय संघर्ष समिति और मेरठ की बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल थे।

वकीलों ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं दलीलें

अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हाई कोर्ट से जुड़े मामलों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। संघर्ष समिति लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग हाई कोर्ट बेंच की स्थापना को न्याय तक आसान पहुंच से जोड़ती रही है।

केंद्रीय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के अधिवक्ता इस मांग से जुड़े हैं। हाल में इन्हीं 22 जिलों में वकीलों ने बेंच समेत विभिन्न मांगों को लेकर कार्य से विरत रहकर प्रदर्शन भी किया था।

योगी ने कहा राज्य सरकार के अधिकार में नहीं

मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत को लेकर अधिवक्ता नेताओं ने बताया कि योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हाई कोर्ट बेंच देना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने इस विषय को सुप्रीम कोर्ट से संबंधित बताया।

वकीलों ने बातचीत के दौरान अन्य क्षेत्रों में न्यायिक बेंचों की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव आगे बढ़ाने की मांग भी रखी। मुख्यमंत्री के जवाब के बाद प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट नजर नहीं आया।

यहां यह महत्वपूर्ण है कि मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और बैठक के विवरण का यह हिस्सा मुख्य रूप से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों द्वारा मीडिया को बताए गए विवरण पर आधारित है।

दशकों से चल रही हाई कोर्ट बेंच की मांग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग नई नहीं है। क्षेत्र के अधिवक्ता संगठन लंबे समय से इसके लिए आंदोलन करते रहे हैं।

उनका कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से इलाहाबाद हाई कोर्ट की मुख्य पीठ तक पहुंचने में काफी समय और खर्च लगता है। इस वजह से मुकदमे से जुड़े लोगों और अधिवक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी आधार पर मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी उपयुक्त स्थान पर हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग लगातार उठती रही है।

केंद्रीय कानून मंत्री से भी मिल चुके हैं वकील

सितंबर की शुरुआत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी मुलाकात की थी।

प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से जुड़ी अपनी दलीलें रखी थीं। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने उनसे कहा था कि इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। यह विवरण संघर्ष समिति द्वारा मुलाकात के बाद मीडिया को दी गई जानकारी पर आधारित था।

22 जिलों में हो चुका है विरोध

हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं ने आंदोलन भी तेज किया है। 16 सितंबर को 22 जिलों में अधिवक्ता कार्य से विरत रहे थे।

मेरठ में मेरठ बार एसोसिएशन और जिला बार एसोसिएशन की संयुक्त आम सभा भी आयोजित की गई थी। इसमें आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई और विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई।

अधिवक्ताओं के काम नहीं करने के कारण अदालतों में जमानत और अन्य न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की भी रिपोर्ट थी।

सीएम के जवाब से वकीलों में नाराजगी

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद केंद्रीय संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने उनके जवाब पर असंतोष जताया। अधिवक्ता नेताओं ने कहा कि वे हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा और महामंत्री परवेज आलम सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार के रुख को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य बार संगठनों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा करने की बात कही।

राजनीतिक दलों पर भी दबाव बनाने की रणनीति

अधिवक्ता संगठनों ने अब इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति बनाई है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि वे हाई कोर्ट बेंच की मांग को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तक और व्यापक स्तर पर ले जाएंगे।

इससे पहले संघर्ष समिति सोशल मीडिया अभियान और जनसंपर्क के जरिए भी इस मुद्दे को उठाने की योजना बता चुकी है।

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी अधिवक्ता संगठन इस मांग को राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख मुद्दे के रूप में रखने की बात कर रहे हैं।

अब आगे की रणनीति पर नजर

मेरठ में मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के बाद हाई कोर्ट बेंच की मांग एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रमुख मुद्दा बन गई है। एक तरफ अधिवक्ता संगठन इसे न्याय तक आसान पहुंच से जोड़कर आंदोलन तेज करने की बात कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लेख किया है।

अब केंद्रीय संघर्ष समिति और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बार संगठनों की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी। अधिवक्ता साफ कर चुके हैं कि वे बेंच की मांग को लेकर अपना अभियान जारी रखेंगे।

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