Lucknow. लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मकान और दुकान किराए पर देने के लिए किरायानामा तैयार कराने की प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में फैसला लिया गया है। कैबिनेट बैठक के बाद राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि किरायेदारी समझौतों पर पहले लागू चार प्रतिशत स्टांप शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इसकी जगह निर्धारित स्लैब के आधार पर निश्चित शुल्क की व्यवस्था लाई गई है। जायसवाल के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य मकान मालिकों और किरायेदारों को औपचारिक समझौता करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष बिना किसी डर या झिझक के किरायानामा तैयार करा सकें, इसके लिए प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि किरायेदारी के संबंधों को दस्तावेजी आधार मिले और दोनों पक्षों को सुरक्षा प्राप्त हो।
मंत्री ने बताया कि सालाना दो लाख रुपये तक के किराए वाले समझौतों पर स्टांप शुल्क एक हजार या दो हजार रुपये होगा। हालांकि, उनके उपलब्ध बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस किराया सीमा पर एक हजार रुपये और किस सीमा पर दो हजार रुपये शुल्क लगेगा। दोनों दरों के बीच का सटीक विभाजन जानने के लिए विस्तृत आधिकारिक आदेश देखना जरूरी होगा। इस घोषणा का संबंध मकानों के साथ दुकानों के किरायेदारी समझौतों से भी है। जायसवाल ने कहा कि राज्य में घर या दुकान किराए पर देना अब अधिक सरल और कम परेशानी वाला बनाया गया है। उनके अनुसार, प्रतिशत आधारित शुल्क की जगह निश्चित स्लैब रखने का मकसद समझौता तैयार कराने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
जायसवाल ने किरायानामे की कानूनी वैधता और किरायेदारी की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि बदलाव के पीछे सोच यह है कि मकान मालिक और किरायेदार अपनी सहमति को विधिवत समझौते का रूप देने में संकोच न करें। उनके बयान में दोनों पक्षों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने और समझौता करने की झिझक दूर करने को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, मंत्री द्वारा बताई गई राशि स्टांप शुल्क से संबंधित है। उपलब्ध बयान में पंजीकरण शुल्क या अन्य संभावित खर्चों की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए एक हजार या दो हजार रुपये को किरायानामा बनवाने का कुल खर्च मानना उचित नहीं होगा। किसी समझौते पर कुल कितना भुगतान करना पड़ेगा, यह संबंधित नियमों और लागू शुल्कों से स्पष्ट होगा।
बयान में किरायेदारी की अवधि के अनुसार दरों में अंतर, पुराने समझौतों के नवीनीकरण और सालाना दो लाख रुपये से अधिक किराए की श्रेणियों का विवरण भी शामिल नहीं है। नई व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी, इसका उल्लेख नहीं किया गया। इन बिंदुओं पर स्पष्टता के लिए अधिसूचना या विभागीय निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कैबिनेट बैठक के बाद दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने किरायानामे पर स्टांप शुल्क की गणना को प्रतिशत आधारित ढांचे से निश्चित स्लैब की ओर ले जाने का निर्णय लिया है। जायसवाल ने इसे मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने वाला कदम बताया। विस्तृत दरें और शर्तें सामने आने के बाद अलग-अलग किराया श्रेणियों पर पड़ने वाला असर स्पष्ट हो सकेगा।