गोरखपुर :  होम लोन माफ कराने का झांसा देकर बैंक से लाखों रुपये का कर्ज कराने और रकम हड़पने के मामले में पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में रेलवे कर्मचारी, उनकी बैंक कर्मचारी बेटी, उसके पति, लोन एजेंट और बैंक से जुड़े कर्मचारियों समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग बैंकों से करीब 93.20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया और बाद में रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। पुलिस ने केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला गोरखपुर के मोहद्दीपुर क्षेत्र का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता मोहन सिंह रेलवे में स्टेशन अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके सहकर्मी और रिश्तेदार ध्रुवनारायण सिंह की बेटी गरिमा सिंह ने उनसे संपर्क किया था। गरिमा ने खुद को एक फाइनेंस कंपनी में काम करने वाली कर्मचारी बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह किसी भी व्यक्ति का लोन बंद करा सकती है।
आरोप के मुताबिक गरिमा ने मोहन सिंह से कहा कि पहले एक बैंक से पर्सनल लोन लिया जाए और उसकी रकम उसे दे दी जाए। इसके बाद उस लोन की ईएमआई वह खुद चुकाएगी और करीब एक साल के भीतर पूरा लोन बंद करा देगी। ध्रुवनारायण सिंह की गारंटी पर मोहन सिंह उसकी बातों पर भरोसा करने के लिए तैयार हो गए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उनके नाम पर सिर्फ एक बैंक से नहीं, बल्कि एक सप्ताह के भीतर पांच अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत करा दिया गया। इन ऋणों की कुल रकम करीब 93 लाख 20 हजार 866 रुपये बताई गई है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, कोटक बैंक और बजाज बैंक से लिए गए ऋण शामिल हैं।
मोहन सिंह के मुताबिक, जब उन्हें कई बैंकों से लोन स्वीकृत होने की जानकारी मिली तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। हालांकि, उन्हें भरोसा दिलाया गया कि सभी लोन बंद करा दिए जाएंगे। आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर चेक के जरिए लोन की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर करा ली गई। बाद में करीब 14 महीने तक गरिमा की ओर से ईएमआई का भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद किस्तें बंद हो गईं।
बैंक की ओर से लगातार फोन आने के बाद मोहन सिंह को मामले की गंभीरता का पता चला। उन्होंने गरिमा के घर पहुंचकर इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की। शिकायत के अनुसार, वहां उन्हें कई अन्य लोग भी मिले, जिन पर इसी तरह के लोन के मामलों में फंसने का आरोप है।
तहरीर में गरिमा सिंह के पति भानू प्रताप सिंह, उनके पिता ध्रुवनारायण सिंह, लोन एजेंट विशाल यादव, चंद्र प्रकाश, राजेंद्र कुमार और एसबीआई से जुड़े लोन कर्मचारी दिनकर मणि त्रिपाठी समेत अन्य लोगों के खिलाफ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षर वाले कुछ ब्लैंक चेक ले लिए गए थे। इतना ही नहीं, उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर बैंक खाता खोले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
मोहन सिंह ने पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में बड़ी रकम शामिल है और कई लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों, लोन से जुड़े दस्तावेजों, चेक और रकम के ट्रांसफर की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि अलग-अलग बैंकों से इतनी बड़ी रकम किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुई और रकम किन खातों में पहुंची। साथ ही पुलिस बैंक कर्मचारियों, लोन एजेंटों और आरोपितों के बीच कथित संबंधों की भी जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि इस मामले से जुड़े आरोपितों के खिलाफ अब तक कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। पुलिस के अनुसार यह इस मामले में चौथा केस है। तीन मुकदमे एम्स थाना क्षेत्र में, जबकि एक मुकदमा सहजनवा थाना क्षेत्र में दर्ज है। गरिमा सिंह और उनके पिता ध्रुवनारायण सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब पुलिस सभी मामलों में आरोपितों की रिमांड लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस बैंकिंग दस्तावेजों, खातों में हुए लेनदेन और आरोपितों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में बैंक कर्मचारियों या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
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