सोनभद्र। सोनभद्र सहित मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब रिहन्द बांध पर दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों से कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होने के कारण बांध के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। जलस्तर बढ़ने से जहां तापीय बिजली परियोजनाओं को बड़ी राहत मिली है, वहीं आने वाले समय में वर्षभर बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
रिहन्द बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की कई महत्वपूर्ण तापीय बिजली परियोजनाओं के लिए पानी का प्रमुख स्रोत माना जाता है। बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बांध के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में बांध के जलस्तर में होने वाली कमी या बढ़ोतरी का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है।
इस वर्ष मानसून की शुरुआत में रिहन्द बांध के कैचमेंट एरिया में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा था। जुलाई के मध्य तक बांध में पानी की स्थिति चिंताजनक हो गई थी। 20 जुलाई की सुबह रिहन्द बांध का जलस्तर घटकर करीब 841.4 फीट तक पहुंच गया था। इससे बिजली परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ने लगी थी।
हालांकि 20 जुलाई के बाद मौसम ने करवट बदली और सोनभद्र सहित मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ गई और जलस्तर में लगातार सुधार दर्ज किया गया। महज तीन दिनों में बांध का जलस्तर 841.4 फीट से बढ़कर 23 जुलाई की सुबह 843.1 फीट तक पहुंच गया। यानी केवल तीन दिनों में करीब 1.7 फीट की वृद्धि दर्ज की गई है।
जलस्तर में इस तेजी से हुई बढ़ोतरी को ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी मानसून सक्रिय रहा और कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होती रही तो रिहन्द बांध तेजी से भर सकता है। इससे तापीय बिजली परियोजनाओं को पूरे साल पर्याप्त पानी मिल सकेगा और बिजली उत्पादन में किसी तरह की बाधा आने की संभावना कम हो जाएगी।
रिहन्द बांध से मिलने वाला पानी ओबरा समेत आसपास की कई बिजली परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जलस्तर कम होने पर बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है, जबकि पर्याप्त जल उपलब्ध होने से उत्पादन क्षमता बेहतर बनी रहती है। इस बार बारिश की वापसी से बिजली विभाग और परियोजना प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है।
वहीं, लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बांध प्रबंधन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि बांध में पानी की आवक इसी तरह जारी रही तो आने वाले दिनों में फाटक खोलने की नौबत भी आ सकती है। हालांकि अभी तक बांध प्रबंधन की ओर से किसी बड़े निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।
स्थानीय लोगों और प्रशासन की नजर अब मानसून की आगे की गतिविधियों पर टिकी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि बांध के जलस्तर, पानी की आवक और बारिश की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
कुल मिलाकर रिहन्द बांध में बढ़ता जलस्तर सोनभद्र और आसपास के ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत की खबर लेकर आया है। मानसून की सक्रियता बनी रही तो न केवल बांध में पर्याप्त जल भंडारण हो सकेगा, बल्कि प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।