मेरठ। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित यूजीसी बिल को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। मेरठ जिले में सवर्ण समाज के लोगों ने इस बिल के विरोध में अनोखे तरीके से प्रदर्शन करते हुए **जल सत्याग्रह** शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में लोग गंगनहर के पानी में उतर गए और सरकार से बिल वापस लेने की मांग करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं के हितों के खिलाफ है।
शनिवार सुबह से ही मेरठ के सरधना क्षेत्र स्थित **सलावा गंगनहर** पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था। देखते ही देखते बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गंगनहर के अंदर उतर गए और पानी में खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार विचार नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
गंगनहर में उतरकर जताया विरोध
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यूजीसी के नए नियमों से समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष है। उनका आरोप है कि इस कानून से सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
जल सत्याग्रह के दौरान लोगों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यूजीसी के नियमों पर दोबारा विचार करने और उन्हें वापस लेने की मांग की।
आंदोलनकारियों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मौके पर पहुंचा प्रशासन
गंगनहर में बड़ी संख्या में लोगों के उतरने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की।
पहले भी यूपी में हो चुके हैं प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले भी विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। लखनऊ समेत कई स्थानों पर सवर्ण संगठनों और अन्य समूहों ने प्रदर्शन कर सरकार को ज्ञापन सौंपे थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे नियम नहीं होने चाहिए जिससे किसी भी वर्ग के छात्रों को नुकसान महसूस हो। उन्होंने सरकार से सभी पक्षों से बातचीत करने की अपील की है।
सवर्ण समाज ने उठाए सवाल
सवर्ण संगठनों का कहना है कि यूजीसी के नए प्रावधानों को लागू करने से पहले सभी वर्गों की राय ली जानी चाहिए। उनका आरोप है कि नए नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। सरकार का पक्ष है कि शिक्षा संस्थानों में समानता और निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियम बनाए जाते हैं।
आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी
जल सत्याग्रह कर रहे लोगों ने कहा कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे आगे भी अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
फिलहाल गंगनहर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
यूजीसी बिल को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब उत्तर प्रदेश में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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