उत्तर प्रदेश : पुलिस के एक कांस्टेबल ने फर्जीवाड़े का ऐसा जाल बुना कि जांच करने वाली पुलिस भी हैरान रह गई। आरोप है कि कांस्टेबल ने अपराधियों और अन्य लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्हें कागजों में पुलिस का सिपाही बना दिया और बैंकों से लाखों रुपये के पर्सनल लोन हासिल कर लिए। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी कांस्टेबल की पहचान नीतीश कुमार यादव के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, उसने बैंक से लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेज, पुलिस पहचान से जुड़े कागज और कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए। इसके बाद उसने दूसरे लोगों के नाम पर लोन लेने का खेल शुरू किया।
ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे की लत बनी वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि नीतीश कुमार यादव ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में काफी पैसा गंवा चुका था। आर्थिक संकट से निकलने के लिए उसने पहले अपने नाम से बैंक लोन लिया। जब उसे लगा कि पुलिस विभाग से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर लोन आसानी से मिल सकता है तो उसने फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
इसके बाद उसने अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और अन्य लोगों के दस्तावेज जुटाए। इन दस्तावेजों में बदलाव कर उन्हें पुलिस कर्मचारी के रूप में दिखाया गया और फिर बैंक से पर्सनल लोन लेने की कोशिश की गई।
तीन बैंक शाखाओं से लिया करीब 39.70 लाख का लोन
जांच में अभी तक सामने आया है कि आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अलग-अलग शाखाओं से करीब 39.70 लाख रुपये का फर्जी लोन लिया। पुलिस के अनुसार, उसने फर्जी पहचान पत्र, वेतन पर्ची, फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट और कर्मचारी सत्यापन जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
पुलिस को शक है कि यह फर्जीवाड़ा सिर्फ कुछ मामलों तक सीमित नहीं है। जांच आगे बढ़ने पर और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितनी रकम का घोटाला किया गया।
पुलिस विभाग और बैंक के बीच समझौते का उठाया फायदा
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने उत्तर प्रदेश पुलिस और बैंक के बीच हुए समझौते का फायदा उठाया। उसने पुलिसकर्मियों को मिलने वाली बैंकिंग सुविधाओं और सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी का गलत इस्तेमाल किया।
आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि लोन लेने वाले लोग पुलिस विभाग में तैनात कर्मचारी हैं। इसके बाद बैंक से आसानी से ऋण स्वीकृत करा लिया गया।
विदेश भाग गया था आरोपी
मामला सामने आने के बाद आरोपी कांस्टेबल फरार हो गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। करीब दो साल तक फरार रहने के बाद वह दुबई से भारत लौटा, जहां दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे गोरखपुर लेकर आई और कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड और फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य मामलों की जांच कर रही है।
आत्महत्या की कोशिश का भी किया प्रयास
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि फरारी के दौरान उसने पकड़े जाने के डर से खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की थी। हालांकि वह बच गया और इसके बाद अलग-अलग जगहों पर छिपता रहा।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फरारी के दौरान उसे किस-किस व्यक्ति से मदद मिली और क्या उसके साथ इस फर्जीवाड़े में कोई अन्य पुलिसकर्मी या बैंक कर्मचारी भी शामिल था।
पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
एक पुलिसकर्मी द्वारा ही पुलिस पहचान और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग में भी हलचल है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
फिलहाल आरोपी कांस्टेबल जेल में है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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