गाजियाबाद: तैनात महिला दारोगा और अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में अस्मिता ने महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि से गाजियाबाद पुलिस के साथ-साथ पूरे देश में खुशी की लहर है।
शुक्रवार को खेले गए महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे का सामना कनाडा की हाइडी क्वाच से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी। निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ी बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबले का फैसला गोल्डन स्कोर के जरिए हुआ। दबाव भरे इस निर्णायक क्षण में अस्मिता ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए जीत हासिल की और भारत की झोली में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक डाल दिया।
अस्मिता डे ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल, क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबलों में अपने विरोधियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। शुरुआत से ही उनके आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल की चर्चा रही। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और आखिरी समय में अपनी रणनीति से जीत हासिल कर ली।
अस्मिता डे वर्तमान में गाजियाबाद पुलिस में महिला दारोगा के पद पर तैनात हैं। उनकी पोस्टिंग पुलिस लाइन में है। इसी वर्ष मार्च में उन्हें दारोगा पद पर प्रोन्नति मिली थी। पुलिस सेवा के साथ-साथ उन्होंने खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। जूडो के प्रति उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है।
उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों ने खुशी जताई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरन नैय्यर ने कहा कि अस्मिता डे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस और गाजियाबाद जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि पुलिस बल के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
अस्मिता की सफलता भारतीय जूडो के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब तक राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन जूडो में स्वर्ण पदक जीतने का इंतजार बना हुआ था। अस्मिता ने इस इंतजार को खत्म करते हुए नया इतिहास लिख दिया।
उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास शामिल है। पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ खेल को जारी रखना आसान नहीं होता, लेकिन अस्मिता ने दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाकर देश के सामने एक मिसाल पेश की है।
गाजियाबाद की इस बेटी की सफलता पर शहरवासियों और खेल प्रेमियों में उत्साह है। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। अस्मिता डे का यह स्वर्ण पदक न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए भी एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। उनके प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।