नौकरी का झांसा देकर खुलवाते थे फर्जी बैंक खाते, 97 खातों में 15 करोड़ का लेनदेन; सात गिरफ्तार
अलीगढ़। नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों के आधार और पैन कार्ड हासिल कर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाने वाले गिरोह का बन्नादेवी पुलिस, क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग नगर और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 97 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें महज दो माह के दौरान करीब 15 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। पुलिस को इन खातों से जुड़ी 67 साइबर फ्रॉड की शिकायतें भी मिली हैं।
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह से जुड़े 21 से अधिक जीएसटी फर्मों के दस्तावेज भी मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित नौकरी और रोजगार दिलाने का लालच देकर लोगों से उनके पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक खाते खुलवाने और कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेनदेन में किया जाता था।
सात आरोपित गिरफ्तार
एसपी सिटी आदित्य बंसल ने बुधवार को मीडिया को गिरोह के खुलासे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र का रहने वाला दिव्यांश कुमार है। बताया गया है कि दिव्यांश करीब सात साल तक दुबई में रह चुका है।
पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और उसके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। पूछताछ में आरोपितों से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खुलवाए गए और इन खातों का संचालन कौन करता था। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बैंक खातों में आए करोड़ों रुपये किन स्रोतों से आए और बाद में उन्हें किन खातों में स्थानांतरित किया गया।
नौकरी के नाम पर हासिल करते थे दस्तावेज
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपित बेरोजगार या नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को रोजगार दिलाने का झांसा देते थे। भरोसा जीतने के बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत अन्य जरूरी दस्तावेज लिए जाते थे।
इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक खाते खुलवाने में किया जाता था। संबंधित लोगों को कई बार इस बात की जानकारी भी नहीं होती थी कि उनके दस्तावेजों के आधार पर बैंक में खाता खोला जा चुका है और उसमें बड़ी रकम का लेनदेन हो रहा है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता था। 97 खातों में सिर्फ दो महीने के भीतर करीब 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का सामने आना पुलिस के लिए भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
67 साइबर फ्रॉड की शिकायतों से जुड़े खाते
पुलिस की जांच में अब तक 67 साइबर फ्रॉड की शिकायतें ऐसे बैंक खातों से जुड़ी मिली हैं। इससे आशंका मजबूत हुई है कि गिरोह के बनाए या उपलब्ध कराए गए खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था।
पुलिस अब इन शिकायतों का मिलान बैंक खातों से कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अलग-अलग साइबर अपराधों से प्राप्त रकम किस खाते में पहुंची और वहां से उसे आगे कहां भेजा गया। इस प्रक्रिया में बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
21 से अधिक जीएसटी फर्मों के दस्तावेज मिले
तलाशी और जांच के दौरान पुलिस को 21 से अधिक जीएसटी फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस अब इन फर्मों की वैधता और उनके संचालन की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन फर्मों का इस्तेमाल केवल कागजों पर किया जा रहा था या इनके माध्यम से वास्तविक कारोबार भी किया जाता था।
यदि जांच में फर्मों के दस्तावेजों का इस्तेमाल भी फर्जी बैंक खातों और साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के लिए किए जाने की पुष्टि होती है, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।
करोड़ों के लेनदेन से बढ़ी जांच की गंभीरता
97 बैंक खातों में दो महीने के भीतर करीब 15 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आने के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों को खंगाल रही है। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन से यह संकेत मिलता है कि गिरोह केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं था और इसके पीछे अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्यों को बैंक खातों के बदले कितना पैसा मिलता था और साइबर ठगी से प्राप्त रकम को आगे भेजने के लिए किस तरह की व्यवस्था बनाई गई थी। इसके अलावा, खाताधारकों की भूमिका भी जांच का विषय है।
दुबई में रह चुका है सरगना
पुलिस के अनुसार गिरोह का कथित सरगना दिव्यांश कुमार करीब सात साल तक दुबई में रह चुका है। अब पुलिस उसके पुराने संपर्कों और विदेश में रहने के दौरान बने नेटवर्क की भी जानकारी जुटा सकती है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि विदेश में रहने के दौरान उसका किन लोगों से संपर्क था और भारत लौटने के बाद उसने किस तरह इस नेटवर्क को तैयार किया।
पुलिस के सामने अब गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की पहचान करना भी चुनौती है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
इस मामले ने नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के बीच साइबर और दस्तावेज संबंधी धोखाधड़ी के खतरे को भी सामने ला दिया है। पुलिस लोगों से अपील करती रही है कि किसी अनजान व्यक्ति या संस्था को आधार, पैन कार्ड और बैंकिंग संबंधी दस्तावेज देने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।
फिलहाल सात आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क, 97 बैंक खातों, 21 से अधिक जीएसटी फर्मों और 67 साइबर फ्रॉड शिकायतों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। करीब 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन ने मामले को गंभीर बना दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और साइबर अपराधों की परतें खुलने की संभावना है।