पूर्व DM दिव्या मित्तल का सादगी भरा अंदाज, आम श्रद्धालुओं की कतार में लगकर किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन
मिर्जापुर। कभी जिलाधिकारी के रूप में मिर्जापुर जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल रविवार को एक अलग अंदाज में नजर आईं। राजनीति की राह पकड़ चुकीं दिव्या मित्तल शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने विंध्याचल पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने किसी विशेष व्यवस्था का सहारा लेने के बजाय आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया और मां विंध्यवासिनी की पूजा-अर्चना की। इससे पहले जिगना क्षेत्र के सुमतिया स्थित शिव गुप्ता मिष्ठान भंडार पर उनका स्वागत और अभिनंदन किया गया।
दिव्या मित्तल का यह दौरा इसलिए भी चर्चा का विषय बना, क्योंकि वह पहले इसी जिले में जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जिले की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्होंने राजनीति की दिशा में कदम बढ़ाया है। रविवार को उनका मिर्जापुर आगमन धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा रहा।
नवरात्र के पहले दिन विंध्याचल पहुंचीं दिव्या मित्तल
शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल मिर्जापुर पहुंचीं।
उन्होंने विंध्याचल स्थित प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की।
नवरात्र के अवसर पर मां विंध्यवासिनी के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।
दिव्या मित्तल ने भी इसी धार्मिक भावना के साथ मंदिर पहुंचकर मां भगवती की आराधना की।
उनके दौरे की खास बात यह रही कि उन्होंने आम दर्शनार्थियों की तरह कतार में लगकर दर्शन किए।
आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में खड़ी रहीं
पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचीं तो उन्होंने सामान्य श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगने का रास्ता चुना।
वह लाइन में खड़ी रहीं और अपनी बारी आने का इंतजार किया।
इसके बाद उन्होंने मां विंध्यवासिनी के दर्शन और पूजा-अर्चना की।
एक समय जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली अधिकारी का आम दर्शनार्थियों के साथ कतार में खड़ा होना उनके इस दौरे की प्रमुख विशेषता रही।
हालांकि, उन्हें दर्शन के लिए कितनी देर इंतजार करना पड़ा, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मंदिर में दर्शन के दौरान उनके साथ कौन-कौन मौजूद था, इसका विस्तृत विवरण भी सामने नहीं आया है।
कभी जिले की जिलाधिकारी रह चुकी हैं दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल पूर्व में मिर्जापुर जिले की जिलाधिकारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं।
जिलाधिकारी के पद पर रहते हुए उनके पास जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारियां थीं।
अब वह प्रशासनिक सेवा से अलग राजनीति की राह पर आगे बढ़ चुकी हैं।
ऐसे में रविवार को उनका मिर्जापुर पहुंचना और मां विंध्यवासिनी के दर्शन करना महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा।
उन्होंने इस दौरान आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन किए।
हालांकि, दिव्या मित्तल के राजनीतिक कार्यक्रमों या आगामी योजनाओं के संबंध में इस दौरे से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राजनीति की राह पकड़ने के बाद धार्मिक दौरा
प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग होने के बाद दिव्या मित्तल ने राजनीति का रास्ता चुना है।
इसी क्रम में वह रविवार को मिर्जापुर जिले में पहुंचीं।
उनका यह दौरा शारदीय नवरात्र के पहले दिन हुआ, जब उन्होंने मां विंध्यवासिनी मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
दिव्या मित्तल ने मंदिर में किसी विशेष व्यवस्था के बजाय सामान्य दर्शनार्थियों की कतार में खड़े होकर पूजा-अर्चना की।
हालांकि, इस धार्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने कोई राजनीतिक बयान दिया या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए उनके दौरे को किसी विशेष राजनीतिक कार्यक्रम या उद्देश्य से जोड़ना उचित नहीं होगा।
जिगना क्षेत्र में हुआ स्वागत और अभिनंदन
विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी के दर्शन से पहले दिव्या मित्तल का जिगना क्षेत्र में स्वागत किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुमतिया स्थित शिव गुप्ता मिष्ठान भंडार पर उनका स्वागत और अभिनंदन हुआ।
इसके बाद वह विंध्याचल पहुंचीं और मां विंध्यवासिनी की पूजा-अर्चना की।
हालांकि, स्वागत कार्यक्रम में कौन-कौन लोग शामिल हुए और कार्यक्रम के दौरान क्या बातचीत हुई, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
इस कार्यक्रम के संबंध में दिव्या मित्तल की ओर से दिए गए किसी बयान की जानकारी भी सामने नहीं आई है।
फिलहाल उनके स्वागत और मंदिर दर्शन की जानकारी उपलब्ध है।
मां विंध्यवासिनी मंदिर का धार्मिक महत्व
मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर देश के प्रमुख देवी तीर्थस्थलों में शामिल है।
यह मंदिर देवी विंध्यवासिनी की आराधना के लिए प्रसिद्ध है।
नवरात्र के दौरान यहां दर्शन और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है।
श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी को शक्ति के स्वरूप में पूजते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं।
शारदीय नवरात्र के अवसर पर मंदिर में देवी आराधना का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
दिव्या मित्तल ने भी नवरात्र के पहले दिन इसी मंदिर में पहुंचकर दर्शन किए।
शारदीय नवरात्र में देवी आराधना का महत्व
शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है।
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और देवी पूजा की परंपरा है।
श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान मां भगवती की आराधना से भक्त आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में भी नवरात्र के अवसर पर दर्शन का विशेष महत्व है।
पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने इसी अवसर पर मंदिर पहुंचकर मां भगवती का आशीर्वाद लिया।
प्रशासनिक पद से अलग दिखा दिव्या मित्तल का अंदाज
मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल का रविवार का दौरा उनके प्रशासनिक कार्यकाल से अलग भूमिका में दिखाई दिया।
पहले वह जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालती थीं, जबकि इस बार मंदिर में सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में खड़ी नजर आईं।
उन्होंने अपनी बारी आने का इंतजार किया और फिर मां विंध्यवासिनी की पूजा-अर्चना की।
इस दौरान उनके किसी विशेष दर्शन व्यवस्था का उपयोग करने की जानकारी सामने नहीं आई है।
उनके दौरे का यही पहलू प्रमुख रूप से सामने आया है।
हालांकि, मंदिर परिसर में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं की प्रतिक्रियाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्वागत के बाद मां विंध्यवासिनी के किए दर्शन
रविवार को मिर्जापुर पहुंचीं दिव्या मित्तल का पहले जिगना क्षेत्र के सुमतिया स्थित शिव गुप्ता मिष्ठान भंडार पर स्वागत और अभिनंदन किया गया।
इसके बाद वह विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचीं।
मंदिर में उन्होंने आम दर्शनार्थियों की तरह कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया और देवी के दर्शन किए।
जिले की पूर्व जिलाधिकारी और अब राजनीति की राह पर आगे बढ़ चुकीं दिव्या मित्तल का यह दौरा नवरात्र की धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा।
इस अवसर पर उन्होंने मां विंध्यवासिनी की पूजा-अर्चना की। प्रशासनिक पद पर रहने के बाद सामान्य श्रद्धालु की तरह दर्शन करने का उनका अंदाज इस यात्रा की प्रमुख विशेषता बनकर सामने आया।