प्रयागराज/वाराणसी। पहाड़ी इलाकों और गंगा-यमुना के प्रवाह क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। प्रयागराज से लेकर वाराणसी तक गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। नदियों में बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन ने तटवर्ती और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। प्रयागराज में पिछले 24 घंटे के दौरान यमुना का जलस्तर 1.32 मीटर बढ़ा है, जबकि गंगा के जलस्तर में भी 32 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे संगम क्षेत्र में पानी तेजी से फैल रहा है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यमुना में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि होने के कारण संगम और आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। घाटों की सीढ़ियां और नदी किनारे के कई हिस्से पानी की चपेट में आने लगे हैं। जलस्तर में वृद्धि जारी रहने पर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
संगम क्षेत्र में पानी बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और घाटों पर गतिविधियां संचालित करने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। नदी के किनारे अस्थायी रूप से काम करने वाले दुकानदारों और अन्य लोगों को भी बदलती स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। प्रशासन जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
प्रयागराज के साथ वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। यहां गंगा के पानी में करीब सात सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से वृद्धि दर्ज की जा रही है। जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों की स्थिति लगातार बदल रही है। रविवार देर रात तक गंगा का पानी शीतला मंदिर के पास तक पहुंच गया था। इसके बाद घाटों और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता और बढ़ा दी गई।
वाराणसी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर भी बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई देने लगा है। यहां कई चिताएं पानी में डूब गई हैं। गंगा का पानी लगातार ऊपर आने से अंतिम संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है। जलस्तर में आगे और बढ़ोतरी होती है तो घाटों पर सामान्य गतिविधियां और अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
गंगा के बढ़ते पानी को देखते हुए वाराणसी में नौकाओं के संचालन पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को कम करना है। तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच नावों का संचालन जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में नाविकों और पर्यटकों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
वाराणसी में गंगा के साथ वरुणा और असि नदी के किनारे भी सतर्कता बढ़ाई गई है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की हिदायत दी जा रही है। पुलिस और प्रशासन के कर्मचारी संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सावधान कर रहे हैं। खास तौर पर निचले और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों से जोखिम नहीं लेने की अपील की गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर मैदानी इलाकों की नदियों पर कुछ समय बाद दिखाई देता है। इसके अलावा गंगा और यमुना के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने से नदियों में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। यही कारण है कि प्रशासन आने वाले समय में जलस्तर के रुख को लेकर सतर्क है। अगर ऊपरी क्षेत्रों से पानी की आवक बढ़ती रही तो प्रयागराज और वाराणसी के साथ रास्ते में पड़ने वाले अन्य तटीय क्षेत्रों में भी स्थिति प्रभावित हो सकती है।
प्रयागराज में संगम क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। वहीं वाराणसी में दशाश्वमेध, मणिकर्णिका समेत अनेक घाटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सामान्य गतिविधियों पर सीधा असर पड़ता है। सुरक्षा के मद्देनजर नदी के बेहद करीब जाने से बचने और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक अमला निचले इलाकों पर विशेष नजर बनाए हुए है। पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी समय रहते जरूरी सामान सुरक्षित करने और पानी तेजी से बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए कहा जा रहा है।
फिलहाल प्रयागराज में यमुना के जलस्तर में 24 घंटे के भीतर 1.32 मीटर की वृद्धि और गंगा में 32 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी चिंता का कारण बनी हुई है। दूसरी ओर वाराणसी में गंगा का जलस्तर सात सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने के कारण घाटों पर पानी फैलता जा रहा है। यदि पहाड़ों और जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहता है तो आने वाले समय में गंगा-यमुना के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में प्रयागराज से वाराणसी तक नदी किनारे बसे क्षेत्रों में प्रशासन के साथ आम लोगों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।