लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क की सतह खराब होने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कदम उठाया है। उद्घाटन के महज एक महीने के भीतर सड़क पर तकनीकी खामी सामने आने के बाद एनएचएआई ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच पूरी होने तक तीन अभियंताओं को काम से हटा दिया गया है।
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया था। उद्घाटन के अगले दिन 14 जुलाई से इस एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए खोल दिया गया था।
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, सड़क पर सामने आई समस्या एक्सप्रेसवे के मुख्य पुल में नहीं बल्कि पुल तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग पर आई है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्नाव जिले के कुरारी के पास संपर्क मार्ग की सतह में खराबी सामने आई है।
उन्होंने कहा कि पहले करीब 20 मीटर हिस्से की मरम्मत की गई थी, लेकिन उसके आसपास के हिस्से में दोबारा खराबी दिखाई देने के बाद अब पूरे 220 मीटर लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत कराने का फैसला लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच कराई जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
एनएचएआई ने कुरारी टोल प्लाजा के पास यातायात को कुछ समय के लिए डायवर्ट किया है। अधिकारियों के मुताबिक, मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है और इसे दो दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रूप से बहाल कर दिया जाएगा।
परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क धंसने के पांच अलग-अलग मामले सामने आने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर नुकसान एक ही संपर्क मार्ग तक सीमित है और मुख्य एक्सप्रेसवे संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
मामले की जांच के लिए एनएचएआई ने एक समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत तीन अभियंताओं को जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
एनएचएआई के मुताबिक, निर्माण कार्य में ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया था, ताकि सड़क की गुणवत्ता और मजबूती बेहतर बनाई जा सके। इसके बावजूद सामने आई तकनीकी समस्या की जांच की जा रही है।
इससे पहले लखनऊ से कानपुर की ओर जाने वाले मार्ग का सर्वे भी कराया गया था। सर्वे के दौरान किलोमीटर संख्या 45.750 के पास तारकोल की परत कमजोर पाई गई। इसके बाद करीब 70 मीटर हिस्से की पुरानी परत हटाकर नई तारकोल बिछाई गई।
अधिकारियों का कहना है कि कुरारी जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों की भी निगरानी की जा रही है। सड़क की मरम्मत के साथ-साथ ड्रेनेज सिस्टम को भी बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि बारिश के दौरान पानी जमा होने से सड़क की सतह को नुकसान न पहुंचे।
एनएचएआई ने शुरुआती जांच में बताया था कि कुरारी के पास सड़क की ऊपरी परत खराब होने की वजह पानी का रिसाव (सीपेज) हो सकता है। बारिश का पानी जमा होने से तारकोल की परत प्रभावित हुई थी। हालांकि सड़क की निचली सतह को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। इस एक्सप्रेसवे से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। अब सड़क खराब होने की घटना के बाद एनएचएआई की जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।