मुरादाबाद : ग्राम स्तरीय अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल सरकारी योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें गांव की हर गतिविधि और समस्या की जानकारी भी होनी चाहिए। यह बात जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने मंगलवार को पंचायत भवन में आयोजित ग्राम स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही।
डीएम ने कहा कि यदि अधिकारी नियमित रूप से गांव में रहेंगे और लोगों के बीच समय बिताएंगे तो स्थानीय समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जा सकेगा। इससे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर संवाद भी स्थापित होगा।
गांव में रात्रि प्रवास पर दिया जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने ग्राम स्तरीय अधिकारियों को गांव में रुकने और रात्रि प्रवास करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि गांव में रहने से वहां की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है। अधिकारी केवल कार्यालय में बैठकर गांव की समस्याओं को पूरी तरह नहीं समझ सकते।
डीएम ने कहा कि गांव में रात्रि प्रवास करने से क्षेत्र की गतिविधियों की जानकारी बढ़ती है और प्रशासनिक इंटेलिजेंस भी मजबूत होता है।
योजनाओं के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
जिलाधिकारी ने कहा कि लेखपाल और ग्राम सचिव जैसे अधिकारियों की भूमिका गांव के विकास में बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें गांव की सामाजिक, आर्थिक और अन्य समस्याओं की जानकारी भी रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अधिकारी अगर ग्रामीणों के संपर्क में रहेंगे तो समस्याएं समय रहते सामने आएंगी और उनका समाधान भी जल्दी हो सकेगा।
पहले गांव में रहते थे अधिकारी
डीएम डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने कहा कि पहले के समय में लेखपाल और ग्राम सचिव गांव में ही रहते थे।
इस कारण ग्रामीणों की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान गांव स्तर पर ही हो जाता था। लोगों को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई स्थानों पर ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है कि लेखपाल और सचिव गांव तक नहीं जाते और कई बार एक-दूसरे को भी नहीं जानते।
ग्रामीणों से बढ़ाएं संपर्क
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीणों के साथ बेहतर तालमेल बनाएं।
उन्होंने कहा कि गांव में जाकर लोगों से बातचीत करने से उनकी वास्तविक समस्याओं की जानकारी मिलती है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिए गए दिशा-निर्देश
पंचायत भवन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान ग्राम स्तरीय अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई।
अधिकारियों को बताया गया कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना जरूरी है।
प्रशिक्षण में ग्रामीण विकास, प्रशासनिक समन्वय और जनसमस्याओं के समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
गांवों में मजबूत होगी प्रशासनिक व्यवस्था
डीएम ने कहा कि जब ग्राम स्तरीय अधिकारी गांव में उपलब्ध रहेंगे तो लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
इससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीणों का भरोसा भी बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को सफल बनाने के लिए अधिकारियों का जमीनी स्तर पर सक्रिय होना बेहद जरूरी है।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी ग्राम स्तरीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने क्षेत्र की नियमित निगरानी करें और ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।
उन्होंने कहा कि गांव में रहने और लोगों से जुड़ने से अधिकारी बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे।
डीएम के इस निर्देश का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ाना और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही समाधान उपलब्ध कराना है।
ग्राम स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीएम के संदेश से साफ है कि अब प्रशासन गांवों में अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रहा है, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंच सके।