NOIDA ग्रेटर नोएडा। थाना दनकौर पुलिस ने 21 अगस्त को सामने आए 10 लाख रुपए गबन प्रकरण का खुलासा कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों में से एक वही ड्राइवर निकला, जिसे गोली लगने के बाद पीड़ित बताया जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों से पूरे 10 लाख रुपए नकद, दो गाड़ियां और अवैध असलहे बरामद किए हैं। 21 अगस्त को डेयरी मालिक जितेंद्र कुमार शर्मा ने अपने ड्राइवर उमेश के जरिए 10 लाख रुपए घर भेजे थे। कुछ देर बाद सूचना आई कि उमेश को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी और नकदी लूटकर फरार हो गए। घायल हालत में उमेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। थाना दनकौर पुलिस की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और सीसीटीवी फुटेज समेत कई अहम सुराग जुटाए। गहन जांच के बाद पुलिस को शक हुआ कि पूरा मामला सामान्य लूटपाट नहीं है। इसके बाद गुरुवार को पुलिस ने यथार्थ अस्पताल, ग्रेटर नोएडा के पास से उमेश पुत्र नरेंद्र पाल को गिरफ्तार किया। उसकी कार भी जब्त कर ली गई। पूछताछ के दौरान उमेश ने सच स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे की झाड़ियों से एक तमंचा .315 बोर और एक खोखा कारतूस बरामद किया।
उमेश के कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसके साले पवन कुमार पुत्र रणपाल सिंह को यमुना एक्सप्रेसवे स्थित सर्विस रोड से गिरफ्तार कर लिया। पवन के कब्जे से 10 लाख रुपए नकद, एक कार, एक तमंचा .315 बोर और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरी वारदात उमेश और उसके साले पवन की सोची-समझी योजना थी। दोनों ने मिलकर डेयरी मालिक के 10 लाख रुपए हड़पने का प्लान बनाया। इसके तहत उमेश ने खुद ही तमंचे से अपने कंधे पर गोली मार ली ताकि घटना वास्तविक लूट जैसी लगे। इसके बाद पैसों से भरा बैग उसने अपने साले पवन को सौंप दिया और तमंचा झाड़ियों में फेंक दिया।गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय उमेश निवासी ग्राम महरिया, थाना फरिया, जिला फिरोजाबाद और 25 वर्षीय पवन निवासी ग्राम नंगला खरगा, थाना फरिया, जिला फिरोजाबाद के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है और आगे की कार्रवाई जारी है। इस खुलासे ने न केवल डेयरी मालिक को राहत दी बल्कि यह भी साबित किया कि पुलिस ने समय रहते मामले की परतें खोलकर गबन की रकम को सुरक्षित वापस कर दिया। यदि मामले की सही जांच न होती तो इसे सामान्य लूट समझकर गुमराह होना आसान था।