प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाराष्ट्र पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध ड्रग निर्माण फैक्ट्री का खुलासा किया है। मीरा-भायंदर, वसई-विरार (MBVV) पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने प्रयागराज में कार्रवाई कर ड्रग बनाने वाली फैक्ट्री को बंद कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र से शुरू हुई ड्रग्स तस्करी की जांच का दायरा और बढ़ गया है।

जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला महाराष्ट्र के नालासोपारा से जून महीने में शुरू हुआ था। नालासोपारा में 112 ग्राम MD (मेफेड्रोन) जब्त किए जाने के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर ड्रग्स नेटवर्क के तार महाराष्ट्र के साथ-साथ गुजरात और उत्तर प्रदेश तक जुड़े पाए गए।

मामले की जांच के दौरान MBVV पुलिस क्राइम ब्रांच ने कई राज्यों में बड़े स्तर पर अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने मुंबई, जलगांव, गुजरात के कुछ इलाकों, कल्याण, नेरुल और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की। इसी जांच के दौरान प्रयागराज में चल रही ड्रग निर्माण गतिविधि का पता चला।

पुलिस के अनुसार, प्रयागराज स्थित जिस फैक्ट्री का खुलासा हुआ, वहां ड्रग्स तैयार किए जाने की आशंका थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री की जांच की और उसे बंद कर दिया। हालांकि बरामद सामग्री और फैक्ट्री से जुड़े अन्य विवरणों की जांच अभी जारी है।

नालासोपारा से शुरू हुई जांच अब एक बड़े ड्रग नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस का मानना है कि ड्रग्स की सप्लाई केवल एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में लगातार कार्रवाई की जा रही है।

MBVV पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने इस मामले में तकनीकी जांच, पूछताछ और मिले सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई की। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रग्स निर्माण में कौन-कौन लोग शामिल थे और तैयार माल की सप्लाई किन इलाकों में की जाती थी।

ड्रग्स तस्करी के मामलों में MD जैसे सिंथेटिक ड्रग्स को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सख्ती बरत रही हैं। ऐसे पदार्थों का अवैध कारोबार युवाओं और समाज के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। इसी वजह से पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियां सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं।

नालासोपारा मामले में 112 ग्राम MD की बरामदगी के बाद पुलिस ने केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की। इसी रणनीति के तहत अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की गई और ड्रग निर्माण से जुड़े संभावित ठिकानों की पहचान की गई।

प्रयागराज में हुई कार्रवाई को इसी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्ट्री कब से संचालित थी, इसमें कितने लोग शामिल थे और यहां तैयार ड्रग्स की सप्लाई कहां-कहां की जाती थी।

जांच एजेंसियां ड्रग नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में कई और लोग शामिल हो सकते हैं। आने वाले समय में पूछताछ और जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

महाराष्ट्र पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी सामने आया है कि ड्रग्स का अवैध कारोबार अब केवल किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है। तस्कर अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क बनाकर काम कर रहे हैं, जिसके कारण जांच एजेंसियों को भी बहु-राज्यीय स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और बरामद सामग्री, दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, मशीनरी और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

इस मामले में पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स सप्लाई चेन को पूरी तरह खत्म करना है। इसके लिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है जो निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े हो सकते हैं।

प्रयागराज में फैक्ट्री के खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध पहले सामने आए किसी अन्य ड्रग्स मामले से है।

महाराष्ट्र से शुरू हुई जांच का उत्तर प्रदेश तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क काफी व्यापक हो सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल छोटे स्तर के तस्करों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी होता है।

फिलहाल MBVV पुलिस क्राइम ब्रांच की जांच जारी है। प्रयागराज में ड्रग निर्माण फैक्ट्री बंद करने के बाद अब पुलिस की नजर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य ठिकानों और लोगों पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

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