रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में दो पत्नियों के बीच फंसे एक व्यक्ति के पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत द्वारा दिया गया फैसला महज एक सप्ताह भी नहीं टिक सका। पिछले सप्ताह पंचायत ने दोनों पक्षों की सहमति से पति के साथ रहने का एक अनोखा फार्मूला तय किया था, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह टूट गई है। बताया जा रहा है कि छोटी पत्नी अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर घर छोड़कर चली गई है, जबकि बड़ी बेटी को घर पर ही छोड़ दिया है। फिलहाल मामले की सूचना पुलिस को नहीं दी गई है और न ही किसी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था। एक व्यक्ति की दो पत्नियां होने के कारण परिवार में लगातार विवाद चल रहा था। दोनों महिलाओं के बीच पति के साथ रहने को लेकर आए दिन कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी रहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला गांव की पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को बुलाकर समझौते का प्रयास किया गया।
लंबी बातचीत के बाद पंचायत ने एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पंचायत ने तय किया कि पति सप्ताह में तीन दिन पहली पत्नी के साथ रहेगा और अगले तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ समय बिताएगा। सप्ताह का एक दिन पति की इच्छा पर छोड़ दिया गया, जिसमें वह अपनी मर्जी से किसी भी पत्नी के साथ रह सकता था। पंचायत को उम्मीद थी कि इस व्यवस्था से दोनों पक्षों के बीच विवाद समाप्त हो जाएगा और परिवार में शांति स्थापित होगी।
शुरुआत में दोनों पक्षों ने पंचायत के फैसले को स्वीकार कर लिया था और उसी के अनुसार व्यवस्था लागू भी कर दी गई। हालांकि यह समझौता ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका। पंचायत के फैसले के करीब एक सप्ताह बाद ही छोटी पत्नी ने घर छोड़ दिया। वह अपने साथ अपनी छोटी बेटी को भी ले गई, जबकि बड़ी बेटी को घर पर ही छोड़ दिया। उसके अचानक घर छोड़ने के बाद परिवार में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि पंचायत के फैसले के बावजूद पति-पत्नी के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए थे। घरेलू विवाद और आपसी असहमति लगातार बनी हुई थी। इन्हीं परिस्थितियों के चलते छोटी पत्नी ने घर छोड़ने का फैसला किया। हालांकि उसने कहां जाकर शरण ली है और आगे क्या कदम उठाएगी, इसकी स्पष्ट जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
वहीं, दूसरी ओर बड़ी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य घर पर मौजूद हैं। बड़ी बेटी भी फिलहाल परिवार के साथ ही रह रही है। घटना के बाद गांव में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग पंचायत के फैसले और उसके विफल होने को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो उसके आधार पर मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला पारिवारिक विवाद के रूप में देखा जा रहा है और पुलिस की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि वैवाहिक और पारिवारिक विवादों का समाधान आपसी सहमति और कानून के दायरे में होना चाहिए। पंचायत के स्तर पर समझौते कई बार तत्काल राहत तो दे देते हैं, लेकिन यदि मूल कारणों का समाधान नहीं होता तो ऐसे फैसले लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह पाते। ऐसे मामलों में सभी पक्षों की सहमति, कानूनी अधिकारों और बच्चों के हितों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है।
सामाजिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि पारिवारिक विवाद केवल समय बांट देने से समाप्त नहीं होते। रिश्तों में विश्वास, संवाद और पारस्परिक सम्मान की कमी होने पर किसी भी प्रकार का समझौता लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में पारिवारिक परामर्श और कानूनी सलाह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल रामपुर का यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। पंचायत के अनोखे फैसले के विफल होने के बाद अब आगे क्या होगा, यह संबंधित परिवार के अगले कदम और यदि आवश्यक हुआ तो पुलिस या न्यायालय में होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, इसलिए पुलिस भी मामले पर नजर बनाए हुए है और शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कह रही है।