धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने का किया ऐलान, 2024 चुनाव की नाराजगी बताई वजह
बरेली। इंटरनेट मीडिया पर “टाटा, बॉय-बॉय” लिखकर पोस्ट साझा करने के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने बुधवार को खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली और संगठन में कुछ लोगों को अहम जिम्मेदारी दिए जाने से आहत हैं। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि आगे किस राजनीतिक दल का रुख करेंगे। उनका कहना है कि वह अपने समर्थकों से बातचीत करने के बाद ही अगला कदम उठाएंगे।
धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी नाराजगी की सबसे बड़ी वजह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी बताई। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने चुनाव लड़ा था, तब पार्टी के ही कुछ लोगों ने खुलकर उनका विरोध किया था। अब यदि वही लोग संगठन में बड़े पदों पर बैठते हैं और पार्टी की ओर से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह स्वाभाविक रूप से दुख पहुंचाने वाली बात है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से पार्टी से जुड़े लोगों की भावनाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक चुनाव के दौरान जिन लोगों ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम किया, यदि बाद में उन्हीं लोगों को संगठन में जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे कार्यकर्ताओं और नेताओं के मन में असंतोष पैदा होता है।
धर्मेंद्र कश्यप ने कहा, “2024 में जब मैंने चुनाव लड़ा और जिन लोगों ने मेरी खुलकर खिलाफत की, वो अगर पार्टी में बड़े पद पर बैठें तो कष्ट होगा। ऐसे लोगों पर पार्टी कोई एक्शन नहीं लेगी तो हम जैसे लोगों को टाटा बाय-बाय कहना ही पड़ेगा।”
उनके इस बयान से यह साफ है कि भाजपा संगठन में हाल में हुई जिम्मेदारियों और पदों के बंटवारे को लेकर उनकी नाराजगी गहरी हो चुकी थी। सोशल मीडिया पर उनकी “टाटा, बॉय-बॉय” वाली पोस्ट को भी इसी नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा था। बुधवार को उन्होंने खुद सामने आकर इस पोस्ट के पीछे की वजह स्पष्ट कर दी।
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया है और संगठन की मजबूती के लिए अपनी भूमिका निभाई। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि 2024 के चुनाव में उनके खिलाफ काम करने वालों के मामले में संगठन कोई ठोस कार्रवाई करेगा। लेकिन ऐसा नहीं होने से उनकी नाराजगी बढ़ती चली गई।
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि आगे का फैसला समर्थकों और कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर होगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में वह अपने करीबी नेताओं और समर्थकों के साथ बैठक कर सकते हैं।
उनका कहना है कि राजनीति में उनका अगला फैसला व्यक्तिगत नहीं होगा। वह अपने समर्थकों की भावनाओं और सुझावों को महत्व देंगे। अभी उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने या नई राजनीतिक भूमिका को लेकर कुछ नहीं कहा है।
धर्मेंद्र कश्यप का यह फैसला स्थानीय और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह पूर्व सांसद रहे हैं और लंबे समय तक भाजपा की राजनीति से जुड़े रहे। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ने का ऐलान संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को भी सामने लाता है।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के भीतर कई क्षेत्रों में संगठनात्मक समीक्षा और बदलाव किए गए। अलग-अलग स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी भी इसी प्रक्रिया से जुड़ी बताई जा रही है।
उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी का विरोध करने वाले कुछ लोगों को बाद में संगठन में महत्व दिया गया। उन्होंने इसे अपने लिए ही नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं के लिए भी निराशाजनक बताया जो चुनाव में पूरी ताकत से पार्टी के साथ खड़े रहे।
पूर्व सांसद के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि उन्होंने अपनी नाराजगी पहले भी संगठन स्तर पर उठाई थी। हालांकि उनके मुताबिक इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने का फैसला घोषित कर दिया।
धर्मेंद्र कश्यप के समर्थकों में भी उनके इस कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ समर्थक उनके साथ खड़े होने की बात कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि खुद धर्मेंद्र कश्यप ने किसी भी तरह की अटकल पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा है कि फैसला समर्थकों की राय से होगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। वह पहले अपने समर्थकों से बात करेंगे और उसके बाद ही आगे की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
भाजपा छोड़ने के ऐलान के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह किसी अन्य प्रमुख दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका अपनाएंगे। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी का केंद्र 2024 का लोकसभा चुनाव और उसके बाद संगठन में हुए बदलाव हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने चुनाव में उनका विरोध किया, उन्हें यदि पार्टी में बड़े पद दिए जाते हैं तो इसे स्वीकार करना मुश्किल है।
उनके बयान ने स्थानीय भाजपा इकाई के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। संगठन की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है।
फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा से अलग होने का अपना फैसला सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सीधे बड़े आरोप लगाने के बजाय संगठनात्मक फैसलों को लेकर अपनी नाराजगी सामने रखी है। अब उनके अगले राजनीतिक कदम पर सभी की निगाहें हैं।
समर्थकों की राय के आधार पर आगे की राह तय करने की बात कहकर धर्मेंद्र कश्यप ने नए राजनीतिक विकल्प के दरवाजे खुले रखे हैं। आने वाले दिनों में उनकी बैठकें और बयान यह साफ कर सकते हैं कि भाजपा छोड़ने के बाद वह किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।