लखनऊ में इंटरनेशनल ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Update: 2025-11-21 16:07 GMT
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘दुनिया के मुख्य न्यायाधीशों के इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ में शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अपने शुरुआती और तात्कालिक उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इसकी संरचना और भूमिका को नए सिरे से समझने और पुनर्निर्मित करने की जरूरत है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “निश्चित ही UN ने अपने तात्कालिक उद्देश्यों को हासिल किया, लेकिन आज आवश्यकता है कि इसे रिबिल्ड किया जाए, इसके बारे में कुछ नया सोचा जाए।” उन्होंने भारत के लंबे समय से चले आ रहे UN सुधारों के रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत की स्थिति स्पष्ट है और अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत आज वह देश नहीं है जो 75–80 साल पहले था। उन्होंने कहा, “जो भारत आज से लगभग 75–80 साल पहले था, वह भारत आज वैसा नहीं है। ऐसे में जब भारत में गतिशीलता आ रही है, तो आज के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन में भी गतिशीलता आना बहुत जरूरी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना बदलाव और लचीलापन अपनाए न तो राष्ट्र और न ही कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन लंबे समय तक टिक पाएगा। उनके अनुसार, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और वैश्विक चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्राथमिकताओं, संरचना और निर्णय प्रक्रिया को री-ओरिएंट करने की आवश्यकता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व व्यवस्था में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं और ऐसे में वैश्विक संस्थाओं का अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और प्रतिनिधित्वकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका को बढ़ाना समय की मांग है।
सम्मेलन में शामिल विश्वभर के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बीच राजनाथ सिंह के संबोधन ने वैश्विक संस्थागत सुधारों पर नई बहस को गति दी। कार्यक्रम में न्यायिक सहयोग, विधिक सुधार, मानवाधिकार और वैश्विक प्रशासन के मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
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