लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार अब अलग-अलग विभागों के डाटा को एकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार की योजना है कि सभी विभागों के आंकड़ों को एक साझा व्यवस्था से जोड़ा जाए, जिससे योजनाओं की बेहतर निगरानी, नीति निर्माण और आम जनता तक सेवाओं की पहुंच को और प्रभावी बनाया जा सके। इसके लिए स्टेट डेटा रेडीनेस रोडमैप तैयार किया जाएगा। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (STC) की ओर से इस संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें तीन दर्जन से अधिक विभागों के 100 से ज्यादा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में विभागों के बीच डाटा साझा करने में आने वाली चुनौतियों, आंकड़ों की गुणवत्ता, अलग-अलग मानकों और डाटा दोहराव जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

एकीकृत डाटा व्यवस्था से आसान होगा काम
सरकार का मानना है कि विश्वसनीय और एकीकृत डाटा किसी भी योजना को सफल बनाने के लिए बेहद जरूरी है। वर्तमान में कई विभाग अपने-अपने स्तर पर आंकड़े तैयार करते हैं, जिससे कई बार जानकारी अलग-अलग स्वरूप में उपलब्ध होती है। नई व्यवस्था में इन आंकड़ों को एक समान मानकों के तहत जोड़ा जाएगा। इससे सरकार को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस योजना का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
योजनाओं की निगरानी होगी बेहतर
डाटा एकीकरण के बाद सरकार को विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षित डाटा आदान-प्रदान और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक मजबूत डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा।
छह समूहों ने दिए सुझाव
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग विषयों पर समूहों में बांटकर चर्चा कराई गई। इन समूहों ने डाटा प्रबंधन, सुरक्षा, गुणवत्ता और आपसी तालमेल को लेकर सुझाव दिए। इन सुझावों के आधार पर स्टेट डेटा रेडीनेस रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसमें डाटा के लिए समान मानक और साझा व्यवस्था तय की जाएगी।
डिजिटल शासन को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दे रही है। डाटा आधारित शासन व्यवस्था से फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी और योजनाओं को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि सही और समय पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाई जाएं, जिससे आम लोगों को सरकारी योजनाओं का अधिक लाभ मिल सके।

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