Lucknow में साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़

Update: 2026-07-03 06:09 GMT

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: लखनऊ पुलिस ने एक बड़े इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक कथित स्कैम कॉल सेंटर पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 119 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे साइबर ठगी गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक गोपनीय सूचना के आधार पर की गई, जिसमें यह सामने आया कि लखनऊ में एक संगठित कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर फ्रॉड किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग ठगी की गतिविधियों में किया जा रहा था।

गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन किन देशों तक फैले हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था।

इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधते हुए कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।

अखिलेश यादव के आरोपों के जवाब में BJP नेता और उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव के दावों को खारिज किया और कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण को लेकर लगातार सुधार हुआ है।

असीम अरुण ने कहा कि साइबर अपराध एक वैश्विक चुनौती है और सरकार इस तरह के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ में की गई यह कार्रवाई पुलिस की सक्रियता और तकनीकी क्षमता का परिणाम है, न कि किसी तरह की प्रशासनिक कमजोरी का संकेत।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके संचालन के तरीकों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर अब एक संगठित वैश्विक अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं, जहां तकनीक का दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, लखनऊ में हुए इस बड़े साइबर फ्रॉड खुलासे ने न केवल कानून व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

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