रेलवे क्लर्क से 60.64 लाख की कथित ठगी, स्टेशन अधीक्षक और बेटी पर केस दर्ज
गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से भरोसे का फायदा उठाकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सहजनवा रेलवे स्टेशन पर तैनात एक कामर्शियल क्लर्क ने स्टेशन अधीक्षक, उनकी बेटी और एक अन्य व्यक्ति पर लोन दिलाने के नाम पर 60.64 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि उसने केवल 10 लाख रुपये का लोन लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न बैंकों से 61.64 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया और बाद में अधिकतर रकम आरोपियों के खाते में ट्रांसफर करवा ली गई। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार पीड़ित संदीप कुमार पाण्डेय मूल रूप से बस्ती जिले के हरैया थाना क्षेत्र के भदासी गांव के निवासी हैं और पिछले तीन वर्षों से गोरखपुर के सहजनवा रेलवे स्टेशन पर कामर्शियल क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि करीब दो वर्ष पहले निजी जरूरत के लिए उन्हें 10 लाख रुपये के लोन की आवश्यकता थी। पुराने ऋण के चलते बैंक से नया लोन मिलने में परेशानी हो रही थी। इसी दौरान उन्होंने स्टेशन अधीक्षक ध्रुव नारायण सिंह से अपनी समस्या साझा की।
आरोप है कि स्टेशन अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि उनकी बेटी बैंक में कार्यरत है और उसके माध्यम से आसानी से नया लोन दिलाया जा सकता है। इसके बाद स्टेशन अधीक्षक ने क्लर्क से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वेतन पर्ची और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए। कुछ समय बाद पीड़ित के बैंक खाते में विभिन्न निजी बैंकों से कुल 61.64 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत होकर जमा हो गया। इतनी बड़ी रकम देखकर संदीप हैरान रह गए क्योंकि उन्होंने केवल 10 लाख रुपये के लोन की बात कही थी।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस पर सवाल उठाया तो स्टेशन अधीक्षक ने उन्हें भरोसा दिया कि पूरी प्रक्रिया उनके नियंत्रण में है और लोन की ईएमआई भी वही जमा करेंगे। विश्वास में आकर संदीप ने करीब आठ दिनों के भीतर एनईएफटी और चेक के माध्यम से लगभग 60.64 लाख रुपये स्टेशन अधीक्षक के खाते में ट्रांसफर कर दिए। उन्हें विश्वास था कि यह राशि आवश्यक प्रक्रिया के तहत उपयोग की जा रही है और भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
कुछ समय बाद अलग-अलग बैंकों से ईएमआई जमा न होने के नोटिस और फोन आने लगे। इसके बाद संदीप को एहसास हुआ कि उनके नाम पर लिए गए लोन की किस्तें जमा नहीं की जा रही हैं। उन्होंने आरोपियों से संपर्क कर रुपये वापस मांगे, लेकिन पहले उन्हें लगातार टालमटोल किया गया और बाद में पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया। लगातार बैंक की नोटिस और वसूली के दबाव के कारण पीड़ित मानसिक तनाव और अवसाद का शिकार हो गए।
पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया कि उनके व्यक्तिगत दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर भारी-भरकम ऋण लिया गया और विश्वास का फायदा उठाकर पूरी राशि हड़प ली गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर स्टेशन अधीक्षक ध्रुव नारायण सिंह, उनकी बेटी और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बैंक खातों, दस्तावेजों और लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि ध्रुव नारायण सिंह और उनकी बेटी को एक अन्य मामले में भी गिरफ्तार किया जा चुका है। एम्स थाना पुलिस ने उन्हें करीब **1.67 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी** के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया था या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वेतन पर्ची और अन्य वित्तीय दस्तावेज किसी भी व्यक्ति को बिना पूरी जांच-पड़ताल के नहीं सौंपने चाहिए। विशेषज्ञ भी समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं कि व्यक्तिगत दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी ऋण, बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अपराध किए जा सकते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लोन या वित्तीय प्रक्रिया में केवल अधिकृत संस्थानों से ही संपर्क करें और अपने दस्तावेजों के उपयोग पर हमेशा नजर रखें।