औरैया डीएसओ पर अभद्र भाषा के आरोप, प्रदेशभर के पूर्ति निरीक्षकों में रोष; कार्रवाई की मांग
मैनपुरी। औरैया के जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) राजेश कुमार की कथित भाषा शैली को लेकर प्रदेशभर के पूर्ति निरीक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है। आरोप है कि डीएसओ ने फोन पर एक पूर्ति निरीक्षक के साथ अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर मैनपुरी के पूर्ति निरीक्षकों ने प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद विभाग के नाम संबोधित ज्ञापन जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपा है।
पूर्ति निरीक्षकों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद और व्यवहार की एक मर्यादा होती है। किसी भी कर्मचारी के साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मामले की जांच कर दोषी अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ऑडियो
जानकारी के अनुसार, सोमवार को सोशल मीडिया पर एक ऑडियो संदेश प्रसारित हुआ था। इसमें कथित तौर पर औरैया के जिला पूर्ति अधिकारी राजेश कुमार और पूर्ति निरीक्षक समीर के बीच बातचीत रिकॉर्ड होने की बात कही जा रही है।
आरोप है कि बातचीत के दौरान डीएसओ ने पूर्ति निरीक्षक समीर के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें अपमानित किया।
बताया जा रहा है कि पूर्ति निरीक्षक ने अपनी बात स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से उनके साथ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
ऑडियो सामने आने के बाद विभाग के अन्य कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई।
मैनपुरी के पूर्ति निरीक्षकों ने सौंपा ज्ञापन
मामले को लेकर मैनपुरी के पूर्ति निरीक्षक लामबंद हो गए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद विभाग को संबोधित ज्ञापन जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी से कोई गलती होती है तो विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अपमानजनक भाषा का प्रयोग उचित नहीं है।
पूर्ति निरीक्षकों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रदेशभर में नाराजगी का दावा
पूर्ति निरीक्षकों का कहना है कि इस घटना को लेकर प्रदेश के कई जिलों में कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि किसी भी विभाग की कार्यप्रणाली बेहतर तभी हो सकती है, जब अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच आपसी सम्मान और समन्वय बना रहे।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है।
विभागीय माहौल पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्य संस्कृति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी विभागों में सभी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
उनका कहना है कि मतभेद या काम से जुड़ी समस्या होने पर भी बातचीत का तरीका मर्यादित होना चाहिए।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल इस मामले में विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है। ऑडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विभाग के अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कर्मचारियों ने मांगी कार्रवाई
पूर्ति निरीक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी कर्मचारी के सम्मान के साथ समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं।