बीटेक छात्रों के नवाचार को मिलेगा बढ़ावा, प्रोजेक्ट के लिए 20 हजार तक अनुदान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीटेक अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को नवाचार और तकनीकी शोध की ओर प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने नई पहल की है। योजना के तहत विद्यार्थियों के चयनित प्रोजेक्ट को अधिकतम 20 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। हर साल अधिकतम 60 प्रोजेक्ट का चयन किया जाएगा। योजना का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं के समाधान पर आधारित नए विचार विकसित करने का अवसर देना है।
योजना में बीटेक अंतिम वर्ष के विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। पात्रता के लिए तीसरे वर्ष तक विद्यार्थी के औसत अंक कम से कम 65 प्रतिशत होना जरूरी होगा। छात्र अकेले भी प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर सकता है और अधिकतम चार विद्यार्थियों का समूह बनाकर भी आवेदन किया जा सकेगा।
चयनित प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा। परिषद ने इसके लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया है। यानी प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद विद्यार्थियों को तीन माह के भीतर अपने मॉडल, तकनीक या समाधान को तैयार कर प्रस्तुत करना होगा।
योजना में ऐसे प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी जाएगी जो समाज और प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हों। विद्यार्थियों के लिए आपदा प्रबंधन, कूड़ा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तकनीक, ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रोजेक्ट में बाढ़, आग, भूकंप या दूसरी आपात स्थितियों के दौरान लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों में मदद करने वाली तकनीक विकसित की जा सकती है। इसी तरह कूड़ा प्रबंधन के क्षेत्र में कचरे को अलग करने, उसका पुनर्चक्रण करने या वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण से जुड़े नए मॉडल बनाए जा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदूषण कम करने, पानी बचाने, वायु गुणवत्ता की निगरानी और हरित तकनीक से संबंधित प्रोजेक्ट तैयार किए जा सकेंगे। कृषि तकनीक के तहत सिंचाई, फसल निगरानी, आधुनिक कृषि उपकरण, सेंसर आधारित खेती और किसानों की लागत कम करने वाली तकनीकों पर काम किया जा सकता है।
ऊर्जा संरक्षण भी योजना के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। विद्यार्थी बिजली की खपत कम करने, सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग, ऊर्जा दक्ष उपकरण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से जुड़े प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे।
स्मार्ट सिटी से जुड़े प्रोजेक्ट में यातायात प्रबंधन, जल आपूर्ति, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं और शहरी सुविधाओं को तकनीक की मदद से बेहतर बनाने वाले विचार शामिल किए जा सकते हैं।
योजना के तहत चुने जाने वाले प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम 20 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस राशि का उपयोग विद्यार्थियों द्वारा मॉडल तैयार करने, जरूरी उपकरण खरीदने, तकनीकी सामग्री और प्रोजेक्ट से संबंधित अन्य आवश्यक खर्चों में किया जा सकेगा।
हर साल केवल 60 प्रोजेक्ट चुने जाने से चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा भी रहेगी। विद्यार्थियों को अपने प्रस्ताव में यह स्पष्ट करना होगा कि उनका प्रोजेक्ट किस समस्या का समाधान करेगा, उसमें क्या नई तकनीक या विचार शामिल है और उसका व्यावहारिक उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
परिषद का प्रयास है कि इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट केवल कॉलेज की औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं को हल करने में किया जा सके। बीटेक के अंतिम वर्ष में विद्यार्थियों को आम तौर पर एक प्रमुख प्रोजेक्ट तैयार करना होता है। नई योजना इस प्रक्रिया को वित्तीय और संस्थागत सहयोग देने का माध्यम बनेगी।
विशेष बात यह है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रोजेक्ट को अतिरिक्त पुरस्कार भी दिए जाएंगे। सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट को एक लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रोजेक्ट को 75 हजार रुपये और तीसरे स्थान वाले प्रोजेक्ट को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
इससे विद्यार्थियों के बीच नए और उपयोगी प्रोजेक्ट तैयार करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। पुरस्कार राशि के साथ विद्यार्थियों को अपनी तकनीक को आगे विकसित करने और उसे बड़े स्तर पर उपयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
तकनीकी संस्थानों के लिए भी यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है। कॉलेज अपने विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, प्रयोगशाला सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करने और स्थानीय समस्याओं पर तकनीकी समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित कर सकेंगे।
विद्यार्थियों के लिए समूह में प्रोजेक्ट बनाने की सुविधा से अलग-अलग तकनीकी कौशल वाले छात्र एक साथ काम कर सकेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, सिविल और अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं के विद्यार्थी मिलकर बहु-विषयक प्रोजेक्ट भी तैयार कर सकते हैं।
तीन महीने की समय सीमा को देखते हुए विद्यार्थियों को शुरुआती चरण से ही स्पष्ट कार्ययोजना बनानी होगी। प्रोजेक्ट का डिजाइन, सामग्री की खरीद, मॉडल निर्माण, परीक्षण और अंतिम प्रस्तुति सभी कार्य समय पर पूरे करने होंगे।
योजना का एक उद्देश्य विद्यार्थियों में शोध और स्टार्टअप की सोच विकसित करना भी है। यदि किसी छात्र का प्रोजेक्ट व्यावहारिक और बाजार के लिए उपयोगी साबित होता है तो वह आगे चलकर स्टार्टअप या बड़े तकनीकी उत्पाद का आधार बन सकता है।
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र हर साल अंतिम वर्ष में तकनीकी प्रोजेक्ट तैयार करते हैं। ऐसे में वित्तीय सहयोग मिलने से उन छात्रों को विशेष फायदा हो सकता है, जिनके पास अच्छा विचार तो है लेकिन मॉडल तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
फिलहाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की इस पहल से बीटेक विद्यार्थियों को अपने नवाचार को वास्तविक रूप देने के लिए आर्थिक सहयोग मिलेगा। 20 हजार रुपये तक के अनुदान और सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट के लिए एक लाख रुपये तक के पुरस्कार ने इस योजना को विद्यार्थियों के लिए आकर्षक बना दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रदेश के इंजीनियरिंग संस्थानों से किस तरह के नए और उपयोगी प्रोजेक्ट सामने आते हैं।