उत्तर प्रदेश: शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET 2026) में शामिल हुए हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान अपनी ओएमआर (OMR) शीट भरने में किसी भी प्रकार की त्रुटि की है, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। आयोग का कहना है कि ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित स्कैनिंग प्रणाली से किया जाता है, जिसमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं है।
इस बार यूपीटीईटी परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट भरने के दौरान अलग-अलग प्रकार की गलतियां हुई हैं। इनमें कई ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं जो वर्षों से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार टीईटी उत्तीर्ण करना उनके लिए आवश्यक था। अब इन शिक्षकों सहित अन्य अभ्यर्थियों को भी आयोग के फैसले से बड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने दो, तीन और चार जुलाई को राज्य के 60 जिलों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराई थी। परीक्षा संपन्न होने के बाद आयोग ने अनंतिम उत्तरकुंजी जारी की और अभ्यर्थियों को केवल प्रश्नों एवं उत्तरों से संबंधित आपत्तियां ऑनलाइन दर्ज कराने का अवसर दिया। इसके लिए आठ जुलाई से 14 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया था।
हालांकि, उत्तरकुंजी जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को यह एहसास हुआ कि उन्होंने परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट भरने में गलती कर दी थी। इसके बाद कई उम्मीदवार प्रयागराज स्थित आयोग कार्यालय पहुंच गए और ऑफलाइन आवेदन देकर अपनी त्रुटियों में सुधार का अवसर देने की मांग करने लगे।
आयोग कार्यालय में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली। पूछताछ काउंटर पर उनके आवेदन जमा कराए गए। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि वे अनजाने में कुछ आवश्यक कॉलम भरना भूल गए थे। कुछ ने विषय चयन वाले कॉलम में गलती कर दी, जबकि कुछ उम्मीदवार भाषा-2 का कॉलम भरना भूल गए। कई अभ्यर्थियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ जरूरी जानकारी वाले गोले (बबल) काले नहीं किए, जिसके कारण अब उन्हें परिणाम को लेकर चिंता सता रही है।
इन अभ्यर्थियों ने आयोग से मानवीय आधार पर राहत देने और ओएमआर शीट में सुधार का अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा संभव नहीं है।
आयोग के उप सचिव ने बताया कि परीक्षा से पहले सभी अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट भरने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर भी परीक्षार्थियों को आवश्यक निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि किसी अभ्यर्थी से त्रुटि हुई है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं अभ्यर्थी की होगी।
उन्होंने कहा कि ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरी तरह स्कैनिंग तकनीक के माध्यम से किया जाता है। पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित होती है और इसमें किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा उत्तर पुस्तिका में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यदि किसी एक अभ्यर्थी को सुधार की अनुमति दी जाती है तो इससे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए नियमानुसार त्रुटिपूर्ण ओएमआर शीट का मूल्यांकन संभव नहीं होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तरकुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया और ओएमआर शीट में सुधार की मांग, दोनों अलग-अलग विषय हैं। आयोग ने केवल प्रश्नों और उत्तरों पर ऑनलाइन आपत्तियां मांगी थीं। ओएमआर शीट में हुई गलतियों को सुधारने का कोई प्रावधान नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ओएमआर शीट भरते समय बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से पहले दिए गए निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए और सभी आवश्यक कॉलम सही तरीके से भरने के बाद ही उत्तर अंकित करने चाहिए। एक छोटी-सी चूक भी पूरे वर्ष की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
आयोग के इस स्पष्ट रुख के बाद अब उन अभ्यर्थियों की उम्मीदें लगभग समाप्त हो गई हैं, जिन्होंने ओएमआर शीट भरने में त्रुटियां की थीं। ऐसे में भविष्य की परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, ताकि इस तरह की गलती दोबारा न हो।