लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास परियोजनाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों की रफ्तार बढ़ा दी है। मई 2026 से अब तक मुख्यमंत्री प्रदेश के 75 में से 44 से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों में 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया है। इनमें सड़क, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पेयजल, पंचायत भवन, पर्यटन और कौशल विकास से जुड़े काम शामिल हैं।
इन 115 विधानसभा क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में अलग-अलग चुनावी तस्वीर देखने को मिली थी। हालांकि लोकसभा चुनाव के विधानसभा-खंडवार आंकड़ों और विधानसभा चुनाव के नतीजों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन ये आंकड़े दोनों चुनावों के बीच मतदाताओं के रुझान में बदलाव की तस्वीर जरूर दिखाते हैं।
2022 में BJP गठबंधन ने जीती थीं 76 सीटें
इन 115 विधानसभा सीटों में 2022 के चुनाव में BJP ने अकेले 71 सीटें जीती थीं। उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने तीन और निषाद पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस तरह BJP और उसके तत्कालीन सहयोगियों के खाते में कुल 76 सीटें आई थीं।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने इन क्षेत्रों में 33 सीटें जीती थीं। उसके तत्कालीन सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने तीन और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली थी।
2024 में बदल गई चुनावी तस्वीर
दो साल बाद हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं 115 विधानसभा क्षेत्रों को लोकसभा परिणामों के विधानसभा-खंडवार आंकड़ों के आधार पर देखने पर तस्वीर बदली हुई दिखाई दी।
समाजवादी पार्टी 54 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जबकि कांग्रेस को 13 क्षेत्रों में बढ़त मिली। यानी SP-कांग्रेस गठबंधन कुल 67 विधानसभा क्षेत्रों में आगे था। इसके मुकाबले BJP 47 और राष्ट्रीय लोकदल एक क्षेत्र में आगे रहा।
इसी बदलाव के कारण ये 115 क्षेत्र 2027 की चुनावी तैयारियों के संदर्भ में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
₹38 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मई से इन क्षेत्रों में अपना दौरा और विकास कार्यक्रम तेज किया है। रिपोर्टों के अनुसार 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को उद्घाटन या शिलान्यास के जरिए आगे बढ़ाया गया है।
इनमें किसी एक क्षेत्र पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। सड़कों और संपर्क मार्गों से लेकर स्कूलों, अस्पतालों, बिजली-पानी की व्यवस्था, पंचायत भवनों, पर्यटन सुविधाओं और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी परियोजनाएं इसमें शामिल हैं।
कई कार्यक्रमों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता भी वितरित की गई और सरकार के पिछले वर्षों के कामकाज को प्रस्तुत किया गया।
रायबरेली में ₹879 करोड़ के काम
इस अभियान में उन क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है जहां 2024 में विपक्ष को बढ़त मिली थी। उदाहरण के तौर पर 24 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रायबरेली पहुंचे थे।
यहां रायबरेली, बछरावां और हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित करीब 879 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इन तीनों विधानसभा खंडों में आगे रही थी।
रायबरेली लोकसभा सीट से 2024 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी निर्वाचित हुए थे।
मैनपुरी और करहल पर भी फोकस
समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले मैनपुरी और करहल क्षेत्र भी मुख्यमंत्री के विकास कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं।
26 जुलाई को मैनपुरी में करीब 682 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की गई। करहल विधानसभा क्षेत्र को समाजवादी पार्टी का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव यहां से विधायक चुने गए थे।
2024 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से सपा उम्मीदवार डिंपल यादव जीती थीं और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को बढ़त मिली थी।
अयोध्या क्षेत्र में भी परियोजनाएं
अयोध्या और उसके आसपास के विधानसभा क्षेत्रों में भी सरकार ने विकास परियोजनाओं पर जोर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार रुदौली और बीकापुर से जुड़े क्षेत्रों में लगभग 810 करोड़ रुपये की परियोजनाएं सामने आईं।
2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में खास चर्चा का विषय बना था।
गोरखपुर में हजारों करोड़ के काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में भी बड़े स्तर पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। मई के बाद जिले में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और संबंधित शहरी एवं औद्योगिक इलाकों को मिलाकर लगभग 4,387 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू या घोषित किए गए।
इनमें गोरखपुर शहरी, पिपराइच, खजनी, चिल्लूपार और गोरखपुर ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों से जुड़े काम शामिल बताए गए हैं।
43 लोकसभा क्षेत्रों में फैली हैं 115 सीटें
ये 115 विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के 43 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में आते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन 43 सीटों में समाजवादी पार्टी ने 21 और कांग्रेस ने तीन लोकसभा सीटें जीती थीं। BJP ने 17 और राष्ट्रीय लोकदल ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
इस लिहाज से सरकार का मौजूदा विकास अभियान केवल विपक्ष के कब्जे वाली लोकसभा सीटों तक सीमित नहीं है। इसमें ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां BJP ने 2024 में अपनी बढ़त बरकरार रखी थी।
विकास परियोजनाओं के साथ जनसंपर्क
मुख्यमंत्री के इन दौरों में विकास परियोजनाओं के साथ जनसंपर्क भी प्रमुख हिस्सा है। कई कार्यक्रमों में लाभार्थियों से संवाद, सरकारी योजनाओं का वितरण और स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक सभाएं आयोजित की गई हैं।
राजनीतिक संदर्भ में इन कार्यक्रमों को 2027 से पहले BJP की व्यापक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं परियोजनाओं का वास्तविक चुनावी असर मतदाताओं की प्राथमिकताओं, स्थानीय उम्मीदवारों, गठबंधन, रोजगार, सामाजिक समीकरण और दूसरे मुद्दों पर भी निर्भर करेगा।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में होता है अंतर
2024 के आंकड़ों को 2027 के विधानसभा चुनाव के संभावित नतीजों के रूप में देखना सही नहीं होगा। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन और मतदान प्रतिशत भी परिणामों को प्रभावित करते हैं।
इसी तरह विकास परियोजनाओं की घोषणा या शिलान्यास अपने आप किसी पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को तय नहीं करता। इन परियोजनाओं के पूरा होने की स्थिति, लोगों तक उनके लाभ की पहुंच और चुनाव के समय मौजूद दूसरे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।
2027 से पहले तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और 2027 के चुनाव से पहले सत्तारूढ़ BJP के साथ विपक्षी दलों ने भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं।
BJP सरकार विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर जनता के बीच पहुंच रही है। वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्ष सरकार के कामकाज, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और अन्य नीतियों को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं।
फिलहाल 115 विधानसभा क्षेत्रों में 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं और मुख्यमंत्री के 44 से अधिक जिलों के दौरों ने इन क्षेत्रों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 2022 और 2024 के बीच यहां दिखाई दिए चुनावी बदलाव के कारण इन सीटों पर 2027 तक सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की गतिविधियों पर नजर बनी रहने की संभावना है।