कानपुर। प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी नारकोटिक्स टीम ने शुक्रवार को एक युवक को गिरफ्तार किया। आरोपी को बाबूपुरवा के ढकनापुरवा इलाके से पकड़ा गया। उसके पास से कोडीनयुक्त सीरप की 2,500 शीशियां बरामद की गईं, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ 95 लाख रुपये बताई गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन शीशियों को फर्जी बिल्टी के जरिए नई दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस नाम की फर्म से वाराणसी और प्रयागराज भेजा जा रहा था।
इस मामले में सामने आया है कि संबंधित फर्म की कोडीनयुक्त सीरप की शीशियां कुछ दिन पहले भी प्रयागराज में पकड़ी जा चुकी हैं। ऐसे में ताजा बरामदगी ने इस आपूर्ति से जुड़े मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। एंटी नारकोटिक्स टीम ने कार्रवाई के दौरान सीरप की बड़ी खेप बरामद की और एक युवक को गिरफ्तार किया है।
ढकनापुरवा में एंटी नारकोटिक्स टीम की कार्रवाई
पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टीम ने शुक्रवार को बाबूपुरवा के ढकनापुरवा इलाके में कार्रवाई करते हुए युवक को गिरफ्तार किया। टीम को प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी से संबंधित मामले में सफलता मिली। आरोपी के पास से कुल 2,500 शीशियां बरामद की गईं।
बरामद सीरप की कीमत करीब 2 करोड़ 95 लाख रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में शीशियों की बरामदगी के बाद यह मामला तस्करी के नेटवर्क और दवाओं की आपूर्ति से जुड़े पहलुओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार युवक की पहचान, उसकी उम्र और यह खेप उसके पास किस परिस्थिति में मिली, इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए आरोपी की भूमिका और पूरे मामले में उसकी कथित संलिप्तता से जुड़े अन्य तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
फर्जी बिल्टी के जरिए भेजी जा रही थीं शीशियां
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कोडीनयुक्त सीरप की शीशियां नई दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस नाम की फर्म से भेजी जा रही थीं। इन शीशियों को वाराणसी और प्रयागराज पहुंचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी बिल्टी का इस्तेमाल किया जा रहा था।
बिल्टी का इस्तेमाल माल की ढुलाई और परिवहन से संबंधित विवरण दर्ज करने के लिए किया जाता है। ऐसे में किसी खेप को फर्जी बिल्टी के जरिए भेजे जाने का आरोप परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच को महत्वपूर्ण बनाता है।
इस मामले में यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, माल भेजने और प्राप्त करने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और खेप को किन स्थानों पर पहुंचाया जाना था। उपलब्ध जानकारी में इन सवालों के विस्तृत जवाब नहीं दिए गए हैं।
फिलहाल, सामने आए तथ्यों के मुताबिक, 2,500 शीशियों की यह खेप वाराणसी और प्रयागराज भेजी जा रही थी। एंटी नारकोटिक्स टीम ने कार्रवाई कर इसे बरामद किया और एक युवक को गिरफ्तार किया।
नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस का नाम फिर सामने आया
इस मामले में नई दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस नाम की फर्म का उल्लेख सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, इसी फर्म की कोडीनयुक्त सीरप की शीशियां कुछ दिन पहले प्रयागराज में भी पकड़ी गई थीं।
एक ही फर्म से संबंधित खेपों का अलग-अलग समय पर पकड़ा जाना मामले की जांच में महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है। हालांकि, केवल इन बरामदगियों के आधार पर फर्म या उससे जुड़े किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता को साबित नहीं माना जा सकता। इसके लिए दस्तावेजों, माल की आपूर्ति और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच आवश्यक होगी।
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि पहले प्रयागराज में पकड़ी गई खेप और कानपुर में बरामद की गई शीशियों के बीच क्या संबंध है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित तौर पर फर्जी बिल्टी का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया और माल की आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित हो रही थी।
प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी पर कार्रवाई
कोडीनयुक्त सीरप से संबंधित मामलों में दवा की प्रकृति, उसकी निर्धारित श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार परिवहन तथा वितरण की वैधता की जांच महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में बरामद शीशियों को प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सीरप बताया गया है और पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टीम ने तस्करी के आरोप में कार्रवाई की है।
बरामदगी की मात्रा और बताई गई कीमत इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बनाती है। करीब 2.95 करोड़ रुपये मूल्य की 2,500 शीशियों को बरामद करने के बाद अब मामले में परिवहन दस्तावेजों और आपूर्ति से संबंधित तथ्यों की जांच अहम होगी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सीरप की प्रत्येक शीशी की मात्रा, दवा की सटीक संरचना और बरामद खेप से जुड़े अन्य दस्तावेजों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन पहलुओं पर कोई अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आपूर्ति नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण
कानपुर के बाबूपुरवा इलाके में हुई इस कार्रवाई के बाद मामले के कई पहलुओं की जांच जरूरी है। इनमें गिरफ्तार युवक की भूमिका, फर्जी बिल्टी के इस्तेमाल का आरोप, नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस से संबंधित खेप और वाराणसी तथा प्रयागराज तक माल पहुंचाने की योजना शामिल हैं।
कुछ दिन पहले प्रयागराज में इसी फर्म की कोडीनयुक्त सीरप की शीशियां पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में दोनों घटनाओं के बीच संबंध की पुष्टि जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल, शुक्रवार को हुई कार्रवाई में एंटी नारकोटिक्स टीम ने एक युवक को गिरफ्तार कर उसके पास से 2,500 शीशियां बरामद की हैं। इनकी कीमत करीब 2 करोड़ 95 लाख रुपये बताई गई है। खेप को कथित तौर पर फर्जी बिल्टी के जरिए वाराणसी और प्रयागराज भेजा जा रहा था। मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी आपूर्ति व्यवस्था और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।