रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में आजम खान, जौहर ट्रस्ट और संबंधित फर्मों तथा व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च की गई रकम और ट्रस्ट की ओर से घोषित खर्च में करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। इतनी बड़ी राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिलने से निर्माण कार्य में इस्तेमाल धन के स्रोत पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल कार्यालय के उप निदेशक पीयूष एस. थोरेट की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं। ईडी की जांच में विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य, वित्तीय लेनदेन और सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं।
जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जौहर विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित विभिन्न इमारतों की लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह मूल्यांकन 10 नवंबर 2023 की जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया। दूसरी तरफ मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच अपने आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय घोषित किया था। दोनों आंकड़ों में करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर मिलने के बाद ईडी ने इस राशि के स्रोत और इस्तेमाल को लेकर जांच तेज कर दी।
ईडी को संदेह है कि विश्वविद्यालय निर्माण में ऐसी राशि का इस्तेमाल किया गया, जिसका पूरा विवरण ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं है। एजेंसी इस संभावना की जांच कर रही है कि निर्माण पर खर्च हुई रकम का संबंध अघोषित आय या दूसरे संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से तो नहीं है। हालांकि, जांच में सामने आया अंतर अपने आप में पूरी राशि को काला धन साबित नहीं करता। इसकी वास्तविक स्थिति विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस मामले में सरकारी धन और संसाधनों के कथित दुरुपयोग का आरोप भी महत्वपूर्ण है। ईडी की जांच में करीब 85.81 करोड़ रुपये के सरकारी धन या संसाधनों का विश्वविद्यालय के निर्माण में अनुचित इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। आरोप है कि आजम खान ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके सरकारी ठेकों और निर्माण कार्यों से जुड़े संसाधनों को निजी ट्रस्ट द्वारा संचालित विश्वविद्यालय के निर्माण में लगवाया। जांच एजेंसी इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।
मामले की जांच के दौरान सरकारी ठेकों से जुड़े लेनदेन की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों के जरिए सरकारी परियोजनाओं की राशि का हिस्सा विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित कंपनियों को मिले ठेकों, निर्माण सामग्री की खरीद और विश्वविद्यालय में हुए कार्यों के बीच किस प्रकार का वित्तीय संबंध था।
जांच रिपोर्ट में सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पवन कुमार जैन के बयान का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को वित्त वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच लगभग 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे। ईडी के सामने दर्ज कथित बयान में इन ठेकों की राशि का एक हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी ने इस कंपनी के माध्यम से कम से कम 55.8 करोड़ रुपये के संभावित डायवर्जन का अनुमान लगाया है। इन दावों की कानूनी पुष्टि अभी बाकी है।
इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय जौहर विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रहा था। एजेंसी ने विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ के साथ ट्रस्ट को मिले चंदे, जमीन से संबंधित लेनदेन और निर्माण पर हुए खर्च की जानकारी जुटाई है। सितंबर में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जहीरुद्दीन से भी करीब आठ घंटे पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई थी।
इसके बाद 13 अक्टूबर को ईडी की तीन सदस्यीय टीम ने रामपुर जेल पहुंचकर आजम खान से करीब आठ घंटे पूछताछ की थी। इस दौरान विश्वविद्यालय के निर्माण, ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और जमीन से जुड़े मामलों पर सवाल पूछे गए। यह पूछताछ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत चल रही जांच का हिस्सा थी। अब नई प्राथमिकी दर्ज होने से मामले में कानूनी कार्रवाई का एक और चरण शुरू हुआ है।
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। रामपुर में स्थापित जौहर विश्वविद्यालय लंबे समय से उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान रहा है। विश्वविद्यालय की जमीन, निर्माण और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित मामलों को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। अब निर्माण लागत और घोषित खर्च में करोड़ों रुपये का अंतर मिलने के आरोपों ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
नई प्राथमिकी के बाद पुलिस संबंधित आरोपों की जांच करेगी। दूसरी तरफ ईडी विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत, ट्रस्ट के दस्तावेजों और संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी रखे हुए है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय परिसर की आंकी गई निर्माण लागत और ट्रस्ट द्वारा घोषित खर्च के बीच अंतर किन कारणों से पैदा हुआ।
फिलहाल आजम खान और संबंधित पक्षों पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। इस मामले में आने वाले समय की जांच यह स्पष्ट करेगी कि 416.14 करोड़ रुपये के अंतर तथा 85.81 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।