लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी, चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने 'समाजवादी ईसीआई ऑडिट-1' जारी किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में करीब 19.20 लाख फर्जी मतदाताओं की पहचान की गई है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग और प्रशासन की मदद से मतदाता सूची में हेरफेर कर रही है। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। हालांकि, चुनाव आयोग या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने 19.20 लाख फर्जी मतदाता होने के दावे की पुष्टि नहीं की है।
समाजवादी ईसीआई ऑडिट-1 जारी कर किया बड़ा दावा
समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से संबंधित कथित गड़बड़ियों का विवरण सामने रखा।उन्होंने इसे 'समाजवादी ईसीआई ऑडिट-1' नाम दिया है। इस रिपोर्ट के माध्यम से पार्टी ने मतदाता सूची में कथित फर्जी नामों और दोहराई गई प्रविष्टियों को लेकर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव का दावा है कि उनकी पार्टी की टीमों ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच की है।इस दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम मिलने का आरोप लगाया गया, जिनके एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत होने की बात कही जा रही है।सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियां चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
19.20 लाख फर्जी मतदाताओं का आरोप
अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में करीब 19 लाख 20 हजार फर्जी मतदाताओं का मामला सामने आया है।उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियां मौजूद हैं।समाजवादी पार्टी के अनुसार, इस तरह के नाम चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, मतदाता सूची में दोहराई गई प्रविष्टि का होना और किसी व्यक्ति द्वारा फर्जी मतदान करना दो अलग-अलग बातें हैं।किसी मतदाता के नाम की एक से अधिक प्रविष्टियां मिलने पर चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और सुधार किया जा सकता है।अभी तक 19.20 लाख मतदाताओं को फर्जी घोषित किए जाने की कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
16.18 लाख फॉर्म-6 को लेकर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।अखिलेश यादव ने आशंका जताई कि इन आवेदनों के माध्यम से फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।हालांकि, फॉर्म-6 के आवेदन की संख्या मात्र से फर्जी पंजीकरण साबित नहीं होता। इसके लिए संबंधित आवेदनों और स्वीकृत प्रविष्टियों की जांच जरूरी होगी।
भाजपा पर चुनाव आयोग की मदद से गड़बड़ी का आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से मतदाता सूची में हेरफेर कर रहा है।उन्होंने दावा किया कि भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए चुनावी व्यवस्था का इस्तेमाल कर रही है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को राजनीतिक आधार पर प्रभावित किया जा रहा है।हालांकि, ये सभी समाजवादी पार्टी के आरोप हैं। आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आने के बाद ही इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एक व्यक्ति के नाम पर कई वोट होने का दावा
अखिलेश यादव पिछले कई दिनों से मतदाता सूची में दोहराए गए नामों का मुद्दा उठा रहे हैं।इससे पहले 12 अक्टूबर को उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची में कई बार दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए दावा किया था कि किसी व्यक्ति के नाम पर दस वोट दर्ज होने की स्थिति सामने आई है।सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि मतदाता सूची में ऐसी प्रविष्टियां कैसे बनी रह सकती हैं।उन्होंने चुनाव आयोग से मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर करने और पारदर्शी जांच कराने की मांग की थी।
एसआईआर प्रक्रिया पर भी उठाए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि कथित फर्जी नामों को लेकर उचित कार्रवाई नहीं हो रही है।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों की प्रविष्टियों को नियमानुसार दुरुस्त करना बताया जाता रहा है।
बीएलओ पर दबाव का भी लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लगे बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ की कार्य परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अत्यधिक काम का दबाव बनाया जा रहा है।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दबाव और कामकाज से संबंधित परिस्थितियों के बीच 29 कर्मचारियों की मौत हुई है।हालांकि, इन मौतों और पुनरीक्षण कार्य के बीच प्रत्यक्ष संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।ऐसे आरोपों की जांच के लिए संबंधित कर्मचारियों के मामले, चिकित्सकीय जानकारी और प्रशासनिक रिकॉर्ड की पड़ताल आवश्यक होगी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर
राजनीतिक
दल अभी से अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है।
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा अब पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।अखिलेश यादव लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से मतदाता सूची का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निष्पक्ष चुनाव के लिए सही और अद्यतन मतदाता सूची आवश्यक होती है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मतदाता सूची का विवादमतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।
याचिका में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित प्रक्रिया और निर्णयों का रिकॉर्ड मांगा है।हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को सही मान लिया है। मामले में न्यायिक परीक्षण अभी जारी है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की वर्तमान कार्यप्रणाली से विपक्षी दलों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।सपा प्रमुख का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।फिलहाल गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए विशिष्ट आरोपों पर चुनाव आयोग और भाजपा की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हो सकी है।
मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक टकराव तेज
अखिलेश यादव के 'समाजवादी ईसीआई ऑडिट-1' जारी करने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची का मुद्दा और प्रमुख हो गया है।समाजवादी पार्टी ने 19.20 लाख कथित फर्जी मतदाताओं और 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का मुद्दा उठाकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।अब इन दावों की सत्यता संबंधित मतदाता रिकॉर्ड, चुनाव आयोग की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
Tags: