लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर बयान देने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है, इसलिए किसी नेता की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आना चाहिए जिसका फायदा भाजपा उठा सके।
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही टिकटों का निर्धारण भी होना है। ऐसे समय में पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नेता तक सभी को अनुशासन और एकरूपता के साथ अपनी बात रखनी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी नेताओं के लिए मुद्दों और बयानों से संबंधित एक पर्चा या पुस्तिका तैयार करेगी, ताकि सभी नेता जनता के बीच पार्टी के निर्धारित विषयों पर ही चर्चा करें।
सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी की ओर से तैयार सामग्री में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, खाद की उपलब्धता, आरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने डायल 100 सेवा को कमजोर कर दिया और एंबुलेंस व्यवस्था भी बदहाल हो गई है। आरक्षण के साथ खिलवाड़ और विभिन्न सरकारी विभागों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी पार्टी जनता के बीच जाएगी।
अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने सरकारी विभागों में हुई कथित लूट और अनियमितताओं से संबंधित पुस्तकें भी तैयार कराई हैं। इन पुस्तकों को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा। सभी लोगों को सलाह दी जाएगी कि वे इन्हीं मुद्दों का अध्ययन करें और चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित एजेंडे से इधर-उधर न जाएं।
इस दौरान अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लाल किला झूठ बोलने का स्थान नहीं है। महिला आरक्षण कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संसद से पारित हो चुका है और सभी राजनीतिक दल इसकी जानकारी रखते हैं। अगर केंद्र सरकार वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो इसकी शुरुआत वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण को लागू करने के लिए तैयार है। उन्होंने देश की सीमाओं की स्थिति और संसद में विपक्षी नेताओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। भाजपा पर हमला करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी और उसके सहयोगी स्वतंत्रता दिवस के मूल संदेश के बजाय विभाजन से जुड़े विषयों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित महिला सहायता योजना को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो सरकार पात्र महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये तक नहीं दे पाई, उसके 50 हजार रुपये देने के वादे पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से भाजपा के चुनावी वादों पर विश्वास नहीं करने की अपील की।
बताया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार पात्र महिलाओं को अलग-अलग चरणों में 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विधानसभा चुनाव से पहले 20 हजार रुपये और नई सरकार बनने के बाद दो चरणों में 10-10 हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई है। अखिलेश यादव ने इसी प्रस्ताव को लेकर भाजपा सरकार पर तंज कसा।
सपा प्रमुख का पूरा संबोधन आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर केंद्रित रहा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि चुनाव में सफलता के लिए व्यक्तिगत और विवादित बयानों से बचना होगा। पार्टी की ओर से तय मुद्दों को ही मजबूती से जनता के बीच रखना होगा। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी किसान, महिला, आरक्षण, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था को आगामी चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाएगी।
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अब नेताओं के बयानों को लेकर अधिक सतर्कता बरतेगी और प्रचार के लिए एक समान एजेंडा तैयार करेगी, ताकि विरोधी दल को किसी विवादित टिप्पणी का राजनीतिक लाभ उठाने का मौका न मिल सके।
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