बलरामपुर: जिले में डीजे म्यूजिक सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। एक छात्रा की मौत के बाद जिलाधिकारी ने डीजे म्यूजिक सिस्टम पर प्रतिबंध लगाने के साथ नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP लागू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि तेज आवाज और अनियंत्रित साउंड सिस्टम से होने वाले खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत जिले में डीजे के संचालन, ध्वनि की तीव्रता और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम के उपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रा की मौत के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमों को और कड़ा करने का फैसला किया। नई SOP में आयोजनकर्ताओं और डीजे संचालकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि किसी भी धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक या निजी कार्यक्रम में साउंड सिस्टम का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत ही किया जा सकेगा। अत्यधिक तेज आवाज, देर रात तक म्यूजिक बजाने और बिना अनुमति डीजे चलाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि आयोजनों से पहले जरूरी अनुमति की जांच की जाए। नियमों का पालन नहीं होने पर साउंड सिस्टम जब्त करने, कार्यक्रम रुकवाने और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
नई SOP लागू होने के बाद स्थानीय पुलिस को भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थानों, बारात, जुलूस और बड़े आयोजनों में डीजे के इस्तेमाल पर विशेष नजर रखी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कार्यक्रम में तेज आवाज लोगों के स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा न बने।
जिला प्रशासन ने आयोजकों से भी अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और तय सीमा से अधिक आवाज में डीजे न बजाएं। प्रशासन का कहना है कि उत्सव और कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। छात्रा की मौत के बाद लिया गया यह फैसला जिले में ध्वनि प्रदूषण और अनियंत्रित डीजे संचालन पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब प्रशासन की नजर इस बात पर रहेगी कि नई SOP का जमीनी स्तर पर कितना पालन होता है और नियम तोड़ने वालों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई की जाती है।
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