छपरा। कहते हैं कि 'जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय।' यह कहावत मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित जयप्रभा सेतु के नीचे उस समय सच होती दिखाई दी, जब सरयू नदी के रेतीले तट पर एक नवजात बच्ची जीवित अवस्था में मिली। बताया जा रहा है कि बच्ची पुल से करीब 50 फीट नीचे पड़ी हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने उसे पुल से नीचे फेंक दिया था। इतनी ऊंचाई से गिरने की आशंका के बावजूद बच्ची का जीवित मिलना लोगों के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। पुलिस की सहायता से बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तत्काल मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात बच्ची को वहां कौन और किन परिस्थितियों में छोड़कर गया था।
सरयू नदी की रेत पर पड़ी मिली मासूम
घटना बिहार के सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र की है। यहां उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले जयप्रभा सेतु के नीचे मंगलवार सुबह एक नवजात बच्ची दिखाई दी।एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची पुल के पाया नंबर 10 के पास करीब 50 फीट नीचे सरयू नदी की रेत पर पड़ी हुई थी।बच्ची को इस हालत में देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए। इतनी छोटी बच्ची नदी के किनारे कैसे पहुंची, यह सवाल लोगों के मन में उठने लगा।इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई।=हालांकि, दूसरी प्रकाशित रिपोर्ट में बच्ची के मिलने का स्थान पाया नंबर आठ के आसपास बताया गया है। ऐसे में वास्तविक स्थान की पुष्टि पुलिस की जांच से ही हो सकेगी।
50 फीट नीचे गिरने के बाद भी बची जान
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा बच्ची के जीवित मिलने की हो रही है।स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति ने नवजात को पुल से नीचे फेंक दिया।यदि ऐसा हुआ है, तो करीब 50 फीट की ऊंचाई से गिरना नवजात के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था।हालांकि, अभी यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि बच्ची को वास्तव में पुल से फेंका गया था या उसे किसी अन्य तरीके से नदी के किनारे छोड़ा गया।पुलिस को घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना बाकी है।चिकित्सकीय दृष्टि से भी ऊंचाई से गिरने के बाद किसी नवजात के शरीर में अंदरूनी चोट होने की संभावना को जांच के बिना खारिज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय युवक विकास डोम ने दिखाई तत्परता
हिन्दुस्तान की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मांझी निवासी युवक विकास डोम ने बच्ची को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बच्ची के मिलने की सूचना के बाद विकास ने पुलिस के सहयोग से उसे सुरक्षित बाहर निकलवाया।घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बच्ची को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत समझी।इसके बाद उसे मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।समय पर बच्ची को अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।घटना के बाद स्थानीय स्तर पर बचाव में मदद करने वालों की सराहना की जा रही है।
मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती
नवजात बच्ची को बचाने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मांझी में भर्ती कराया गया।यहां चिकित्सकों ने उसकी प्रारंभिक जांच की और आवश्यक देखभाल शुरू की।एक अन्य समाचार रिपोर्ट के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोहित कुमार ने शुरुआती परीक्षण में बच्ची की हालत स्वस्थ बताई।हालांकि, इतनी छोटी उम्र के बच्चे के लिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है।डॉक्टरों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि बच्ची को किसी प्रकार की अंदरूनी चोट, संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है।फिलहाल बच्ची के स्वास्थ्य संबंधी आगे के परीक्षणों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
बच्ची के होंठ कटे होने की जानकारी
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, नवजात बच्ची के होंठ जन्मजात रूप से कटे हुए हैं।चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को क्लेफ्ट लिप कहा जाता है।यह एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें ऊपरी होंठ का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता।क्लेफ्ट लिप वाले बच्चों को कुछ परिस्थितियों में दूध पीने और पोषण प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।हालांकि, उचित चिकित्सा देखभाल और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की मदद से इसका उपचार संभव है।बच्ची के मामले में डॉक्टर उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आगे की देखभाल और उपचार का निर्णय लेंगे।महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्ची को छोड़ने की घटना का उसके कटे होंठ से कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है। ऐसा कोई निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जाना चाहिए।
पुलिस कर रही बच्ची के परिजनों की तलाश
नवजात बच्ची मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्ची किसकी है और उसे सरयू नदी के किनारे कौन छोड़कर गया।पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बच्ची बिहार की रहने वाली है या उत्तर प्रदेश की।जयप्रभा सेतु दोनों राज्यों को जोड़ता है। इसलिए इस मामले में आसपास के क्षेत्रों से जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण हो सकता है।फिलहाल बच्ची की पहचान और उसके माता-पिता के संबंध में कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।इसके अलावा किसी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की भी पुष्टि नहीं हुई है।
क्या बच्ची को पुल से फेंका गया था?
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में यह चर्चा है कि बच्ची को जानबूझकर पुल से नीचे फेंका गया होगा।
हालांकि, यह फिलहाल आशंका है।
पुलिस जांच में घटनास्थल की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।बिना किसी प्रत्यक्षदर्शी बयान या ठोस प्रमाण के यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी व्यक्ति ने बच्ची को पुल से नीचे फेंका ही था।इसी तरह इस घटना के पीछे पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी या बेटी होने के कारण भेदभाव जैसी किसी वजह को भी अभी स्थापित नहीं किया जा सकता।जांच के बाद ही वास्तविक घटनाक्रम और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
नवजात बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने नवजात बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।जन्म के तुरंत बाद शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।नवजात बच्चे अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, भोजन प्राप्त करने और बाहरी खतरों से बचने के लिए पूरी तरह वयस्कों पर निर्भर होते हैं।ऐसे में किसी नवजात को खुले स्थान पर छोड़ देना उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।खासकर नदी, सड़क, सुनसान क्षेत्र या अत्यधिक गर्मी और ठंड वाले स्थानों पर छोड़े गए बच्चों के सामने कई स्वास्थ्य संबंधी जोखिम होते हैं।इसलिए ऐसी घटनाओं में बच्चे को तत्काल सुरक्षित स्थान और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
बच्ची के संरक्षण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण
ऐसे मामलों में अस्पताल में उपचार के साथ नवजात के दीर्घकालिक संरक्षण की व्यवस्था भी आवश्यक होती है।यदि किसी बच्चे के माता-पिता या अभिभावक की पहचान नहीं हो पाती, तो संबंधित प्रशासन को बाल संरक्षण की कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है।भारत में बच्चों की देखभाल और संरक्षण से जुड़े मामलों में बाल कल्याण समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और बाल संरक्षण इकाई के समन्वय से बच्ची की सुरक्षा और आगे की देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है।हालांकि, इस विशेष मामले में बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने या किसी संरक्षण गृह में स्थानांतरित किए जाने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
घटना से लोगों में हैरानी और आक्रोश
सरयू नदी के तट पर नवजात बच्ची मिलने की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया।एक ओर लोग बच्ची के जीवित मिलने पर राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसे इस हालत में छोड़ने की आशंका ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।लोग चाहते हैं कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करे और यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर बच्ची को खतरे में डाले जाने की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।